देश में नई आईआईटी और आईआईएम खोलने का ऐलान भले ही केंद्र सरकार ने जोर शोर से कर दिया हो लेकिन इसे खोलने के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। देश में नई आईआईएम और आईआईटी खोलने के लिए कई राज्यों को इतने बड़े क्षेत्रफल की जमीन नहीं मिल पा रही है।
जुलाई में पेश मोदी सरकार के आम बजट में देश में पांच नई आईआईटी और छह आईआईएम खोलने का प्रस्ताव किया गया था। मगर कई राज्य अभी तक मानव संसाधन मंत्रालय को सटीक जगह का अता पता नहीं बता पाए हैं।
आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने मानव संसाधन मंत्रालय से उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए तय नियमों में ढील करते हुए जमीन के क्षेत्रफल को घटाने की गुजारिश की है। इन राज्यों का कहना है कि उनके राज्यों में इतनी बड़े क्षेत्रफल में जमीन नहीं मिल पा रही है।
इसलिए इसका दायरा घटाते हुए शिक्षण संस्थानों के कैंपस को छोटा किया जाए। मंत्रालय ने भी इनकी बात को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रफल की सीमा को घटाने का मन बनाया है।
बजट में मोदी सरकार ने किया था ऐलान
आंध्र प्रदेश सरकार ने मानव संसाधन मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह तिरूपति में आईआईटी खोलने का प्रस्ताव रखा है। मगर उसे इतना बड़ा प्लॉट नहीं मिल रहा है। उसने चिट्ठी लिखकर आईआईटी के लिए जमीन को लेकर तय मापदंड 500 एकड़ को घटाकर 200 एकड़ की मांग की है।
आईआईएम के लिए कैंपस का तय मानदंड अभी 200 एकड़ है जबकि ट्रिपल आईआईटी के लिए 100 एकड़ भूमि होनी चाहिए। छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर और गोवा ने अभी तक कोई अपना प्रस्ताव नहीं भेजा है।
आईआईएम खोलने का प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र में रखा गया था। मगर मानव संसाधन मंत्रालय को इन राज्यों से कोई सटीक उत्तर नहीं मिल पाया है। जबकि मंत्रालय भी पिछले पांच महीने से इस मसले पर चुप्पी साध कर बैठा हुआ था। इस सिलसिले में कोई बैठक नहीं हुई थी।
अब जब कई राज्यों ने जमीन का मुद्दा उठाया तो मंत्रालय ने इस सिलसिले में उच्च शिक्षा मामलों के मंत्रालय के सचिव सत्यनारायण मोहंती की अध्यक्षता में समिति बना दी गई है। बाकी सदस्यों में पूर्व शिक्षा सचिव एम के काव, पुणे से शिक्षाविद्व अनिल साहरबुधे, आईआईटी रूड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर के अध्यक्ष अशोक मिश्रा, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति सैयद बारी, आईसीआईसीआई बैंक के के वी कामथ शामिल हैं।