अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ शुक्रवार को होने वाली बातचीत के बावजूद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा का फोकस पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ होने वाली उस मुलाकात पर टिक गया है जिसका कोई कार्यक्रम ही तय नहीं हो सका है।
संकेत साफ हैं कि न्यूयॉर्क में छुट्टी के दिन दोनों मिलेंगे, लेकिन बातचीत के मुद्दों को लेकर अड़चनें अभी बाकी हैं।
बातचीत का कोई सार्थक नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं की जा रही है, इसलिए इसके लिए कोई भी पक्ष उत्साहित नहीं दिख रहा है।
बुधवार को नई दिल्ली से रवाना होते वक्त तक प्रधानमंत्री की सात दिन की इस अमेरिका यात्रा के तय कार्यक्रमों में नवाज शरीफ से मुलाकात का कहीं जिक्र भी नहीं है।
लेकिन रवानगी से ठीक पहले जारी उनके बयान के अंत में जिन तीन पड़ोसी देशों से बातचीत की उम्मीद जताई गई है उसमें अंतिम नाम पकिस्तान का है।
वॉशिंगटन में 27 सितंबर को राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद अगले दिन मनमोहन सिंह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित करेंगे।
उसी दिन वे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मिलेंगे। अगले दिन रविवार होने के कारण सारे राष्ट्राध्यक्ष छुट्टी मनाएंगे।
मनमोहन सिंह का भी उस दिन कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। माना जा रहा है कि इसी छुट्टी के मूड में बहुप्रतीक्षित मनमोहन-नवाज मुलाकात होगी।
विशेष विमान में प्रधानमंत्री के साथ यात्रा कर रहे अधिकारियों को मीडिया ने सबसे ज्यादा नवाज के साथ मुलाकात पर ही घेरा।
इस पर साफ तौर पर बोलने से सभी बचते रहे, सिर्फ इतनी पुष्टि की कि 29 सितंबर को दोनों मिलेंगे तो द्विपक्षीय हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर बात होगी।
आतंकियों को संरक्षण का मुद्दा अहम
आधिकारिक सूत्रों के संकेत के अनुसार नवाज शरीफ के सामने सीमा पार से कश्मीर में घुसपैठ, पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी और नियंत्रण रेखा के उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं के साथ भारत में आतंक मचाने वालों को संरक्षण देने के असहज मुद्दे होंगे।
वर्तमान स्थितियों में पाकिस्तान की ओर से किसी ठोस कदम का आश्वासन की उम्मीद नहीं लगती है। संभावना यही है कि यह मुलाकात महज औपचारिकता ही रह जाए।
बड़ा धर्मसंकट है सामने
मनमोहन सिंह से मिलने से दो दिन पहले नवाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित करेंगे।
माना जा रहा है कि इस अंतरराष्ट्रीर मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाने से वे बाज नहीं आएंगे। अगले दिन ही महासभा को मनमोहन संबोधित करेंगे। मजबूरन मनमोहन को भी इस पर प्रहार करना पड़ेगा।
भारतीय जनता की उम्मीद होगी कि वे इस मंच से पाकिस्तान की करतूतों से भी दुनिया को अवगत कराएं। ऐसे माहौल में दोनों की बातचीत के कोई सार्थक परिणाम की उम्मीद नहीं है।
चुनाव के मुहाने पर खड़ी सरकार के लिए सांप-छछूंदर की स्थिति है क्योंकि किसी भी स्थिति में इससे विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल जाएगा।
प्रधानमंत्री जर्मनी के शहर फ्रैंकफर्ट बुधवार को पहुंच गए हैं। वह बृहस्पतिवार को वाशिंगटन जाएंगे। अगले दिन ओबामा से मुलाकात के बाद उनके स्वागत में भोज भी दिया जाएगा।