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'मन' के तीखे तीर, सुषमा का शायराना जवाब

Thu, 07 Mar 2013 08:40 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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आम तौर पर शांत रहकर विरोधियों को परास्त करने में माहिर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह बुधवार को लोकसभा में आक्रामक दिखे। भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कांग्रेस और खुद पर लगे आरोपों का उन्होंने तीखा जवाब दिया।
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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा देश के मतदाताओं के हाथों भाजपा को पिछले दो आम चुनावों में मुंह की खानी पड़ी है और आगामी चुनाव में भी इसका यही हश्र होगा।

उन्होंने आंकड़े देकर यह साबित करने की कोशिश की कि यूपीए ने हर मामले में एनडीए से बेहतर शासन दिया है। उन्होंने भाजपा के हमलों का सीधा जवाब देते हुए कहा, ‘जो गरजते हैं वो बरसते नहीं।
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शेरो शायरी और व्यंग्य बाण

राष्ट्रपति के अभिभाषण प्रधानमंत्री ने तीखे व्यंग्य बाण ही नही छोड़े, शेरोशायरी के जरिए भी अपनी बातें कहीं। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने शेरोशायरी के जरिए प्रधानमंत्री के
व्यंग्य बाणों का जवाब दिया।

मनमोहन ने अपने भाषण में विपक्षी भाजपा नेताओं से मुखातिब होकर मिर्जा गालिब का शेर कहा, 'उनसे वफा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफा क्या है।' इस पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने डा सिंह को याद दिलाया, 'कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।

प्रधानमंत्री के सवालों के जवाब में स्वराज ने कहा, 'भाजपा इसलिए प्रधानमंत्री की आलोचना करती है क्योंकि वह देश के साथ बेवफाई कर रहे है। देश के साथ बेववफाई करने वाले के प्रति हम वफा नहीं कर सकते।'

उन्होंने प्रधानमंत्री को मुखातिब करते हुए एक और शेर पढ़ा, ' तुम्हें वफा याद नहीं हमे जफा याद नहीं, जिंदगी और मौत के दो ही तराने है एक तुम्हे याद नहीं एक हमें याद नहीं।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री के तीखे तेवरों के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री पिछले नौ साल में इतने आक्रामक कभी दिखे जितने आज नजर आए। उन्होंने कहा दरअसल बुझने से पहले दीपक की लौ बहुत तेज हो जाती है।

सांसद भी हो गए भौचक

अमूमन शांत रहने वाले प्रधानमंत्री को आक्रामक तेवरों में देखकर सांसद भी भौचक थे। दरअसल, भाजपा की राष्ट्रीय परिषद के महाधिवेशन में कांग्रेस नेतृत्व के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ और यूपीए सरकार पर जिस तरह के आरोप लगाए गए, प्रधानमंत्री उससे काफी आहत दिखे।

उन्होंने बाकायदा इस महाधिवेशन का जिक्र कर कहा कि वहां कांग्रेस नेतृत्व पर पर जिस तरह का हमला किया गया, उसका जवाब देने के लिए वे उस स्तर तक नहीं जान चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि भाजपा महाधिवेशन में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को ‘दीमक’ और इशारों में प्रधानमंत्री को ‘नाइट वॉचमैन’ (चौकीदार) बताया था।

प्रधानमंत्री की पीड़ा यह थी कि उनकी उपलब्धियों को कमतर आंका जा रहा है। अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए उन्होंने आंकड़ों का जमकर इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि यूपीए शासन के नौ साल में जीडीपी विकास दर औसतन 7.9 फीसदी रही है, जबकि एनडीए शासन में मात्र छह फीसदी।

प्रधानमंत्री का जवाब मुख्यत: देश की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहा, लेकिन वे भाजपा के आरोपों का करारा जवाब भी इसी में देते रहे।

उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर अगले एक-दो साल में आठ फीसदी तक पहंच जाने की उम्मीद है। उन्होंने अपने भाषण में यूपीए सरकार के आठ साल की उपलब्धियां गिनाई तो दूसरी ओर एनडीए शासन से तुलना भी की।
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