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कोयला घोटालाः पूर्व पीएम को अब अपने पूर्व मंत्री का सहारा

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कोलगेट मामले में विशेष अदालत की ओर से आरोपी के तौर पर जारी समन के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिकाओं पर संभवत: शुक्रवार को सुनवाई होगी।
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मनमोहन सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल जबकि बिड़ला की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पैरवी करेंगे। 2005 में ओडिशा के तालाबीरा कोयला खदान आवंटन मामले में विशेष अदालत ने मनमोहन सिंह, बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख समेत छह लोगों को बतौर आरोपी समन जारी किया था। यह खदान बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को आवंटित की गई थी।

याचिकाओं में समन पर रोक लगाने की गुहार की गई है। साथ ही इस मामले की सुनवाई पर भी रोक लगाने की गुहार है। सूत्रों के मुताबिक, याचिकाओं में कहा कि इनके खिलाफ पुख्ता सबूत न होने के बाद भी विशेष अदालत ने समन जारी कर दिया।
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मनमोहन, बिरला और पारिख ने की याचिकाओं दायर

याचिकाओं में कहा गया कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री की सलाह पर प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया निर्णय क्रिमिनल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही यह भी कहा गया है कि विशेष अदालत को यह परीक्षण करने का अधिकार नहीं है कि राज्य को प्राइवेट सेक्टर प्रोजेक्ट का समर्थन करना चाहिए है कि पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट को।

विशेष अदालत ने मनमोहन सिंह समेत सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा-120 बी(आपराधिक षडयंत्र) और धारा 409 (लोकसेवक, या बैंकर और व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात करना) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी बनाकर तलब किया है। इन सभी को आठ अप्रैल को अदालत में पेश होने केलिए कहा गया है।
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मनमोहन की दलील

याचिकाओं में कहा गया है कि पुख्ता सबूत न होने के बाद भी विशेष अदालत ने समन जारी कर दिया। उड़ीसा के मुख्यमंत्री की सलाह पर प्रधानमंत्री (मनमोहन) द्वारा लिया गया निर्णय क्रिमिनल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

क्या है मामला
वर्ष 2005 में ओडिशा केतालाबीरा कोयला खदान आवंटन मामले में विशेष अदालत ने मनमोहन सिंह, बिरला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख समेत छह लोगों को बतौर आरोपी समन जारी किया था। यह खदान बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को आवंटित की गई थी।
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