लाल ग्रह के रहस्यों को सुलझाने के लिए भेजे गए मंगलयान ने अब तक की सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है।
शनिवार आधी रात के बाद यान धरती की कक्षा से निकलकर अपने अंतर्ग्रहीय सफर पर चल पड़ा। इस तरह से मंगलयान ने अपने सफर का पहला चरण पूरा कर लिया है।
अब वह 10 माह की लंबी यात्रा के दौरान करीब 68 करोड़ किमी की दूरी तय कर सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में पहुंचेगा। लाल ग्रह की सतह से करीब 80 हजार किमी की दूरी से यान उसका चक्कर काटते हुए अहम जानकारियां भेजेगा।
इसरो के मुताबिक यान को धरती की कक्षा से बाहर निकालकर अंतर्ग्रहीय सफर पर भेजने की कार्रवाई को पूरा करने में करीब 22 मिनट का समय लगा। इस दौरान कोई दिक्कत नहीं आई और यान बिल्कुल ठीक तरीके से धरती के गुरुत्वाकर्षण के दायरे से बाहर निकल गया।
इसरो ने एक बयान में कहा है कि इस प्रक्रिया के साथ ही मंगलयान के धरती के चक्कर काटने की क्रिया भी पूरी हो गई है। अब यह 10 माह तक सूर्य के चारों ओर घूमते हुए मंगल की कक्षा में प्रवेश करने की राह पर है।
शनिवार आधी रात के बाद 12.49 बजे यान को धरती की कक्षा से निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए मंगलयान को 648 मीटर प्रति सेकेंड के वेग की जरूरत थी जिसे उसमें लगे 440 न्यूटन के प्रमुख इंजन में फायर करने के बाद हासिल कर लिया गया।
बीते माह की पांच तारीख को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन केंद्र से मंगलयान को प्रक्षेपित किए जाने बाद से इसरो ने इसे धरती की एक कक्षा से दूसरी कक्षा में भेजने (ऑर्बिट रेजिंग) के लिए पांच बार ऐसी ही प्रक्रिया को अंजाम दे चुका है, लेकिन यान को धरती के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकालकर उसे अंतर्ग्रहीय सफर पर भेजना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है।
मंगलयान पर बंगलूरू स्थित इसरो के अंतरिक्ष यान नियंत्रण केंद्र से लगातार नजर रखी जा रही है। अगर मंगलयान सफलतापूर्वक सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में पहुंच जाता है तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की एक लंबी छलांग होगी। भारत ऐसा करने वाले अमेरिका, यूरोप और रूस के बाद चौथा राष्ट्र बन जाएगा।