भागती दौड़ती मुंबई में जहां पलभर भी रुकने का समय नहीं वहां एक नौजवान किसी अनजान की मदद करने के लिए अपना सब काम छोड़ 70 किमी. की दूरी तय करता हुआ खून देने पहुंचा।
टीओआई के खबर के अनुसार मुंबई में बदलापुर के रहने वाले 21 साल के आदेश गजरे कोच्चि में रहने वाले एक अनजान व्यक्ति को अपना खून देने के लिए रविवार को बदलापुर से बांद्रा गए।
आदेश का ब्लड ग्रुप आरएच नेगेटिव है। यह बहुत दुर्लभ ब्लड ग्रुप है। उनका खून बॉम्बे ब्लड ग्रुप में आता है और मुंबई में इस ब्ल्ड ग्रुप के बहुत कम लोग हैं।
आदेश की इस मानवीयता को देख रविवार को भी उनसे रक्तदान कराया गया। आमतौर पर ब्लड बैंक रविवार को रक्तदान नहीं लेते हैं पर महात्मा गांधी सेवा मंदिर ब्लड बैंक ने ऐसा किया।
आदेश का कहना है कि मैं नहीं जानता कि वह व्यक्ति कौन है। मुझे यह मालूम था कि भारत में उसकी मदद कोई नहीं कर सकता था।
आरएच नेगेटिव के देश में केवल 70 लोग
आदेश के ब्लड ग्रुप की दुर्लभता का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस ब्लड ग्रुप वाले पूरे देश में केवल 70 लोग हैं। यह बॉम्बे ब्लड ग्रुप, दुर्लभ ब्लड ग्रुप की सूची में शामिल है।
थिंक फाउंडेशन नाम का एक गैर सरकारी संगठन मरीजों को ऐसे ब्लड ग्रुप वाले लोग ढूंढने में मदद करता है। मुंबई में 25 बॉम्बे पॉजिटिव ग्रुप और 4 बॉम्बे नेगेटिव ग्रुप के लोगों की सूची इस संगठन के पास मौजूद है।
अखबारों में थी अपील
थिंक फाउंडेशन के मुताबकि 26 साल के रणजीव को जल्द ही आर नेगेटिव खून की जरूरत थी। उनके लिए कोच्चि से जल्द ही रक्तदान के लिए सोशल मीडिया और अखबारों के जरिए अपील की गई थी लेकिन कोई भी रक्तदान के लिए सामने नहीं आया था।
तब मुंबई में इस ब्लड ग्रुप के लोगों से संपर्क किया गया। उनमें से दो नंबर से कांटेक्ट नहीं हुआ और एक शहर से बाहर गए थे। उसके बाद आदेश को फोन कर इस बारे में बताया गया।
आदेश बताते हैं कि उन्हें शनिवार तक भी अपने ब्लड ग्रुप का पता नहीं था। मैंने भारत कॉलेज में रक्तदान किया है लेकिन मुझे अपना बॉम्बे ब्लड ग्रुप होने की जानकारी नहीं थी।
थिंक फाउंडेशन से बंगलुरू से समन्वय करने वाले रणजीव के दोस्त का कहना है रणजीव तक खून मंगलवार को पहुंचा दिया गया लेकिन उन्हें अभी दो या तीन बोतल खून की और जरूरत है।