मुंबई की एक स्थानीय कोर्ट ने 2005 में हुई 30 वर्षीय इंडियन एअर फोर्स के कर्मचारी की शादी को इसलिए निरस्त कर दिया क्योंकि उसने दावा किया था कि उसकी शादी के समय उसकी पत्नी 8 महीने की गर्भवती थी।
कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के आधार पर कहा कि शादी के समय औरत अगर किसी दूसरे आदमी से गर्भवती हुई हो, उसे निरस्त किया जा सकता है।
खार का रहने वाले इस व्यक्ति ने बताया कि वह उस औरत को जानता था, जो उसके पड़ोस में रहती थी। 2006 में दायर यचिका में उसने कहा कि 2005 में उसकी मां और एक समाजिक कार्यकर्ता उसे डॉक्टर के पास ले गए, जिसने उसे बताया कि महिला गर्भवती है। महिला के पूरे परिवार वालों ने उस पर आरोप लगाया कि यह 'बच्चा' उसी का है।
उस समय 22 साल के उस व्यक्ति ने इस बात से इंकार किया और कहा कि महिला की किसी और के साथ दोस्ती है। जिसके बाद उस महिला और उसके परिवारवालों ने मुझे धमकी देना शुरू कर दिया।
9 जून 2005 को उसकी मां और एक समाजिक कार्यकर्ता उसे जबरदस्ती बांद्रा कोर्ट लेकर गए और उससे किसी कागज पर साइन करने के लिए कहा। उसके बाद वे मुझे लेकर एक मंदिर में लेकर गए और जबरदस्ती मेरी शादी उस महिला से करा दी। उन्होंने उसे धमकी भी दी कि अगर वह उसकी बातों को नहीं मानते हैं तो उसका अंजाम बुरा होगा साथ ही उसकी नौकरी भी छूट जाएगी।
उसने कहा कि विवाह के समय वह औरत आठ महीने से गर्भवती थी। जुलाई 2005 में उसने एक लड़की को जन्म दिया। अक्टूबर 2005 में उस महिला और उसकी मां ने मुझे गालियां, धमकी और मार पीट की और कहा कि वह उसे और उसके बच्चे को अपने घर ले जाए, जिसे मैंने मना कर दिया।
यह साफ नहीं है कि वह दोनों कभी एक साथ रहे हैं या नहीं लेकिन उसने याचिका में कहा कि यह शादी मान्य ही नहीं है। उसने बताया कि चूंकि वह एक बौद्ध है और विवाह की सारी विधियां हिंदू मंदिर में हुई थी इसलिए यह विवाह मान्य नहीं है।
इस याचिका को खारिज करने के लिए औरत की ओर से डाली गई याचिका में कहा गया कि यह मुझे परेशान करने और मेरे चरित्र को बदनाम करने की साजिश है। उस महिला ने कहा कि वह उसे गिफ्ट देता था, उसका ख्याल रखता था और शादी भी करना चाहता था लेकिन जैसे ही मैं गर्भवती हुई उसने मुझसे शादी करने से मना कर दिया। उस महिला ने कहा कि वह जो भी कह रहा है वह 'मनगढ़ंत' है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला दो तारीखों में अनुपस्थित रही है, जब उससे कोर्ट में सवाल-जवाब किए जाते इसलिए उसके द्वारा दिए गए सभी प्रमाणों को कैंसिल किया जाता है।