चुनाव आयोग की सख्ती के आगे आखिरकार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झुकना पड़ा। ममता अब आयोग के आदेश के मुताबिक सात अधिकारियों का तबादला करने पर राजी हो गई हैं।
इससे पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को बुधवार सुबह दस बजे तक अफसरों का तबादला करने का अल्टीमेटम दे दिया था।
अटकलें लगाई जा रही थीं कि अफसरों का तबादला नहीं किए जाने पर आयोग पश्चिम बंगाल में चुनाव कार्यक्रम स्थगित करने जैसा कड़ा कदम भी उठा सकता है।
अब ममता बोलीं, मुझे कोई आपत्ति नहीं
बढ़ते दबाव के बीच ममता ने मंगलवार शाम दुर्गापुर में कहा कि चुनाव आयोग के आदेश का पालन करते हुए चार एसपी, एक डीएम और दो एडीएम का तबादला किया जाएगा। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
एक दिन पहले ममता ने दो टूक कहा था कि वे चुनाव आयोग के आदेश पर अफसरों का ट्रांसफर नहीं करेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तार ही क्यों न होना पड़े।
आयोग हुआ सख्त तो झुकी राज्य सरकार
इससे पहले राज्य के मुख्य सचिव संजय मित्रा ने अधिकारियों के तबादले के मामले में कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही फैसले पर चुनाव आयोग से पुनर्विचार का अनुरोध किया था। लेकिन आयोग ने उन्हें भेजे जवाब में अपने आदेश का पालन कराने को कहा।
साथ ही अफसरों के तबादला आदेश पर 9 अप्रैल की सुबह दस बजे तक कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि आयोग अपने कामकाज में इस तरह के हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा।
ममता भले ही अफसरों का तबादला नहीं करने की जिद पर अड़ी थीं लेकिन राज्य सरकार के सामने आयोग का आदेश मानने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनाव से जुड़े अधिकारी चुनाव आयोग के अधीन आ जाते हैं।
ममता ने की विनोद जुत्सी को हटाने की मांग
चुनाव आयोग के दबाव में ममता बनर्जी अपने सात अधिकारियों के तबादले पर तो राजी हो गईं, लेकिन उन्होंने उप चुनाव आयुक्त विनोद जुत्सी को आयोग से हटाने की मांग भी कर डाली।
उन्होंने आरोप लगाया कि जुत्सी भाजपा और कांग्रेस के हाथों में खेल रहे हैं। ममता ने कहा कि जुत्सी दागी हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं। ऐसे व्यक्ति से सिर्फ पश्चिम बंगाल का चार्ज वापस लिया जाना चाहिए, बल्कि उसे चुनाव आयोग से ही हटाना चाहिए।
'ममता को जेल में डाल देना चाहिए'
पश्चिम बंगाल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें चुनाव आयोग ने अधिकारियों का ट्रांसफर कर सीएम की योजना पर पानी फेर दिया है। साथ ही आयोग के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।
चौधरी ने आरोप लगाया, ‘मुझे लगता है कि ममता बनर्जी को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज देना चाहिए। क्या यह मजाक हो रहा है कि उनके मन में जो आ रहा है, कह रहीं हैं और संविधान के नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। उन्होंने चुनावों में आतंक फैलाने की योजना बनाई थी, लेकिन चुनाव आयोग ने अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश देकर इस योजना पर पानी फेर दिया।’
पिछले साल पंचायती चुनावों के दौरान भी राज्य सरकार और चुनाव आयुक्त मीरा पांडे में ठन गई थी। उन्होंने आगे कहा, ‘उन्हें लगता है कि जिस ढंग से उन्होंने पिछले साल पंचायती चुनाव में मीरा पांडे के साथ व्यवहार किया था, वैसा ही व्यवहार भारतीय चुनाव आयोग के साथ कर सकती हैं। मगर इस बार ममता बनर्जी को ऐसा सबक सिखाया जाएगा, जिसे वह याद रखेंगी।’