महाराष्ट्र के मालेगांव में वर्ष 2006 में हुए धमाकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
चार्जशीट में असीमानंद और पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित का नाम नहीं है।
मुंबई की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में कट्टर हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर के नाम हैं।
इन सभी पर साजिश रच कर धमाकों को अंजाम देने के आरोप लगाए गए हैं। इन धमाकों में 37 लोगों की मौत हो गई थी। चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
इस मामले में प्रमुख आरोपी लोकेश शर्मा समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में भी मुख्य आरोपी है। उसे मालेगांव धमाके में इस साल के शुरू में गिरफ्तार किया गया था।
लोकेश ने आतंकी संगठन को धमाकों को अंजाम देने के लिए मदद मुहैया कराई थी। एनआईए के मुताबिक चौधरी भी मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है।
मामले में तीन आरोपी रामचंद्र कालसांगरा, संदीप डांगे और अमित हल्का अभी फरार हैं। जांच जारी होने की वजह से इनके नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किए गए हैं। कालसांगरा पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है।
मालूम हो कि मुंबई पुलिस के आतंक रोधी दस्ते (एटीएस) ने इस मामले में नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था।
बाद में मामला एनआईए के पास पहुंचने पर मालेगांव धमाकों की जांच में तब नया मोड़ आ गया, जब अभिनव भारत संगठन के सदस्य स्वामी असीमानंद ने इकबालिया बयान में कहा था कि ब्लास्ट को हिंदूवादी संगठन ने अंजाम दिया।
इस खुलासे ने एटीएस के साथ ही सीबीआई को भी शर्मसार कर दिया। 8 सितंबर, 2006 को शब-ए-बारात के दिन मालेगांव में चार बम प्लांट किए गए थे।
मालेगांव में इसके बाद 2008 में भी एक धमाका हुआ, जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल एस पुरोहित आरोपी हैं।