बीते जमाने की अभिनेत्री माला सिन्हा ने दादासाहेब फाल्के अकेडमी अवॉर्ड लेने से इंकार कर दिया है।
अवार्ड कमेटी द्वारा उनका उचित ढंग से सम्मान नहीं किए जाने के चलते उन्होंने ऐसा किया।
उन्हें मंगलवार को अवॉर्ड दिया जाना था, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही निमंत्रण पत्र पर इसकी जानकारी दी गई।
माला सिन्हा ने कहा, ‘मुझे बताया गया कि मुझे फाल्के अकेडमी अवॉर्ड मिलना है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि मेरा नाम वहां पर नहीं था। मुझे कौन सा अवॉर्ड मिलना है, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।
मैंने किसी अवॉर्ड की मांग नहीं की थी, उन्होंने ही इसके लिए मुझे चुना था। मुझे यही नहीं पता कि मुझे कौन सा अवॉर्ड मिलना है, यह तो बेहद अपमानजनक है। मुझे बहुत बुरा लगा है।’
बॉलीवुड की इस अभिनेत्री ने 50 और 60 के दशक में बहुत सी हिट फिल्मों में काम किया था।
उनके द्वारा की गई 100 से ज्यादा फिल्मों में प्यासा (1957), धूल का फूल (1959), दिल तेरा दीवाना (1962), गुमराह (1963) और हिमालय की गोद में(1965) काफी पसंद की गई थीं।
खास बात यह है कि माला सिन्हा 25 अप्रैल को पुरस्कारों की घोषणा के वक्त की गई प्रेस कांफ्रेंस भी मौजूद थीं।