फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बापू थे अपर हाउस और कालेनबाख लोअर हाउस

Wed, 30 Jan 2013 10:40 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में अगर बहुत कुछ जानने का दावा करते हैं तो बताइए कि कौन उन्हें ‘अपर हाउस’ बुलाता था। इसी से जुड़ा दूसरा सवाल है कि वो किसे ‘लोअर हाउस’ के नाम से पुकारते थे।
विज्ञापन


इन दोनों सवालों के जवाब तो हम आपको दे देंगे, लेकिन अगर आप बापू के जीवन के ऐसे ही रोचक और अनछपे पहलुओं को जानना चाहते हैं तो दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार पहुंच जाएं। यहां जर्मनी के हरमन कालेनबाख और महात्मा गांधी के बीच लिखे गए पत्रों की प्रदर्शनी लगी हुई है। कालेनबाख, बापू के अजीज दोस्तों में से एक थे।

इन दोनों की नजदीकी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गांधी जी और हरमन एक-दूसरे को क्रमश: अपर हाउस और लोअर हाउस के नाम से बुलाते थे। वजह यह थी कि अपर हाउस बजट तैयार करता था, जबकि लोअर हाउस का काम वीटो लगाना होता था। दोनों के बीच पांच दशकों तक जमकर पत्राचार हुआ था। इनका संग्रह राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद है। इसमें से बहुत सी सामग्री अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।
विज्ञापन


बुधवार को इन खतों की प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने किया। प्रदर्शनी 15 फरवरी तक चलेगी। आयोजकों को उम्मीद है कि इन पत्रों से गांधीजी के कार्य और उनके जीवन दर्शन के विश्लेषण में मदद मिलेगी।

इन खतों में महात्मा गांधी और कालेनबाख ने कानूनी मामलों, रूसी लेखक टॉलस्टॉय में अपनी साझा दिलचस्पी का जिक्र भी किया है। साथ ही ट्रेन में तीसरे दर्जे का सफर करने के अनुभव, भोजन, एक महिला मित्र की उनसे मिलने की बेचैनी, दक्षिण अफ्रीकी फार्म हाउस के दैनिक कार्यों की तारीफ आदि छोटी-छोटी बातें भी लिखी हैं।

यही नहीं, इन खतों में गांधीजी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के बारे में भी बहुत सी बातें साझा की हैं। एक जगह उन्होंने लिखा है कि वह बा को केपटाउन लाना चाहते हैं, जिससे चिंता और परेशानी से मुक्ति मिल जाए। उन्होंने लिखा है, ‘अब उन्हें और नाराज नहीं करना चाहता, क्योंकि वह बहुत ही प्यारी हैं। उन्होंने आज कुछ अंगूर खाए, लेकिन फिर बीमार हो गईं। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे वह ढलती जा रही हैं।’

रिश्ता विवादों में
वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई किताब ‘ग्रेट सोल: महात्मा गांधी एंड हिज स्ट्रगल विद इंडिया’ में बापू और कालेनबाख के नजदीकी संबंधों पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस किताब को पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले लेखक जोसेफ लेलीवेल्ड ने लिखा था।

कौन थे कालेनबाख
यहूदी हरमन कालेनबाख (1871-1945) का जन्म जर्मनी में हुआ था। बाद में वह दक्षिण अफ्रीका आ गए। 1904 में उनकी मुलाकात गांधी जी से हुई। गांधी जी के विचारों के प्रभाव में आकर उन्होंने जोहानिसबर्ग के नजदीक अपना एक हजार एकड़ का फार्म हाउस दान कर दिया था। बाद में यही ‘टॉलस्टॉय फार्म’ के रूप में विकसित हुआ, जहां सत्याग्रहियों के परिवार रहा करते थे। बाद में यही स्थान गांधीवादी दर्शन की प्रयोगशाला बन गया। 1914 में वतन वापसी के समय महात्मा गांधी और कस्तूरबा के साथ कालेनबाख भी थे।

और भी बहुत कुछ है यहां
प्रदर्शनी में गांधी जी के साइमन कालेनबाख (हरमन कालेनबाख के भाई), भतीजी हाना लेजर के संबंधों का चित्रण भी है। वहीं गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता, सीएफ एंड्रयूज, महादेव देसाई, प्यारे लाल, सुशीला बैन, मीरा बैन, मगन लाल गांधी, मनिलाल गांधी, देवदास गांधी, रामदास गांधी सहित तमाम स्वतंत्रता सेनानियों के पत्र भी रखे गए हैं।

प्रदर्शनी में गांधी जी और कालेनबाख की निकटतम सहयोगी इसाबेल फाइवी मेयो के कुछ पत्र भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा 287 तस्वीरें और स्मरणीय प्रतीक चिन्ह भी शामिल हैं, जो कालेनबाख के जीवन में गांधी जी के प्रभाव को दर्शाते है। यंग इंडिया और हरिजन की मूल प्रतियां भी इसमें शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें