महाराष्ट्र सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सोमवार को सभी पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। पत्र में विभाग ने आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिसमें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
महाराष्ट्र सहित पूरे देश में ट्रक और बस चालक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस से अपील की है कि बाजार में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। दरअसल, संसद द्वारा हाल ही में पास हुए आपराधिक बिल के एक नियम को लेकर चालक गुस्साए हुए हैं। इसी नियम के कारण चालक प्रदर्शन कर रहे हैं।
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विभाग ने पुलिस को लिखा पत्र
महाराष्ट्र सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सोमवार को सभी पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। पत्र में विभाग ने आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिसमें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। पत्र में कहा गया है कि पैक्ड लॉरी चालक हड़ताल कर रहे हैं। वे काम पर नहीं आ रहे। इस वजह से एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई बधित हो रही है। यही हाल पेट्रोल, डीजल और केरोसिन सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का भी है।
ट्रक चालकों से जताई उम्मीद
पत्र में आपूर्ति को बधित करने वाले ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ ईएससीओ अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का भी आग्रह किया गया है। विभाग ने भी उम्मीद जताई है कि चालक किसी भी अप्रिय घटनाओं में शामिल न हों और कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न करें। विभागीय अधिकारियों की मानें तो राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग) ने विभाग से अनुरोध किया है कि हम इस विरोध प्रदर्शन में हस्तक्षेप करें और जल्द से जल्द इसे सुलझाएं।
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अब जानें, किस कानून को लेकर हो रहा है प्रदर्शन
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार द्वारा पेश किए तीनों आपराधिक कानून वाले बिल को लोकसभा और राज्यसभा ने पास कर दिया है। इस बिल में तीन अलग-अलग कानून हैं, लेकिन विरोध भारतीय न्याय सहिंता के एक नियम को लेकर हो रहा है। दरअसल, भारतीय न्याय सहिंता में प्रावधान किया गया है कि सड़क दुर्घटना के बाद अगर ट्रक-बस चालक पुलिस-प्रशासन को बिना सूचना दिए भाग जाते हैं तो चालकों को 10 साल तक की जेल हो सकती है। 10 साल की जेल के साथ-साथ सात लाख के जुर्माना का भी प्रावधान है।