मध्य प्रदेश में नियुक्त आईएएस, आईपीएस और भारतीय वन सेवा अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार व अन्य आपराधिक मामलों के आरोपों की जांच करने का अधिकार सीबीआई के पास नहीं है। खुद राज्य सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी से यह अधिकार छीन लिए हैं। एक पखवाड़े पहले राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में काम कर रहे मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई कार्रवाई नहीं कर सकती।
12 अक्तूबर को जारी आदेश के मुताबिक, ‘राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस संगठन के सदस्यों के क्षेत्राधिकार को विस्तार को अपनी सहमति दे दी है। इसके मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारियों के खिलाफ आरोपों की जांच का अधिकार सीबीआई के पास होगा। मगर मध्य प्रदेश कैडर के अंतर्गत आने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को इससे बाहर रखा गया है।’
मध्य प्रदेश सरकार के सीनियर अफसरों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है और वह इसे कुछ नया नहीं बता रहे हैं। जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा, ‘मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इस तरह की अधिसूचना की निंदा करते हैं। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए।’