रेल किरायों में इजाफे के बाद मोदी सरकार गैस कीमतों को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले को लेकर पिछले तीन दिनों के दौरान पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दो बार मिल चुके हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली और धर्मेंद्र प्रधान के साथ मिल कर प्रधानमंत्री कंपनियों के लिए गैस की बढ़ाई जाने वाली कीमतों पर मशविरा कर रहे हैं। कीमतें एक स्वीकार्य सीमा तक बढ़ाई जा सकती हैं।
शुक्रवार को मोदी ऊर्जा सेक्टर की समस्याओं पर प्रधान से पांच घंटे तक बातचीत कर चुके थे। लेकिन रविवार को उन्होंने एक बार फिर उनसे मशविरा किया। इस बातचीत में जेटली भी शामिल हुए।
रंगराजन कमेटी ने की सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार की बैठक में गैस कीमतों को बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि नई सरकार सुस्त पड़े तेल और गैस सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी पैदा कर सके।
सरकार इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहती है। रंगराजन कमेटी की सिफारिशों में गैस की कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू से बढ़ा कर 8.4 डॉलर एमबीटीयू तक बढ़ाने की बात की गई थी।
उम्मीद है कि सरकार इस ओर हल्की बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। नई दरों की घोषणा इस सप्ताह की शुरुआत में हो सकती है।
गैस की कीमत बढ़ने से और बढ़ेगी महंगाई
तेल और गैस उत्पादक कंपनियां कह रही हैं कि गहरे समुद्र से गैस निकालने की लागत काफी बढ़ गई है और उन्हें 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू की कीमतों से घाटा होगा।
लेकिन पिछली सरकार की ओर से बनाए गए फॉर्मूले पर गैस की कीमतें तय की जाती हैं तो बिजली दरों समेत यूरिया, सीएनजी और रसोई गैस सभी के दाम बढ़ जाएंगे।
ऊंची महंगाई दर और खाद्य महंगाई में हालिया इजाफे के अलावा मानसून की बारिश में कमी की आशंका के मद्देनजर सरकार में इस बात को लेकर भी बहस चल रही है कि गैस कीमतें बढ़ीं तो महंगाई और बढ़ेगी।
कितनी बढ़ेगी महंगाई?
गैस कीमत में एक डॉलर के इजाफे से यूरिया के एक टन उत्पादन की लागत 1370 रुपये बढ़ जाएगी। जबकि बिजली दरों में प्रति यूनिट 45 पैसे का इजाफा हो जाएगा।
सीएनजी की कीमत 2.81 रुपये प्रति किलो बढ़ जाएगी जबकि घरों में पाइप के जरिये आने वाली गैस की कीमत में 1.89 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी होगी।