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अब हर महीने बढ़ सकते हैं गैस और केरोसिन के दाम

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राजनीतिक रूप से संवेदनशील हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और इसके भाव को अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमतों के साथ जोड़ देने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार अब एलपीजी और केरोसिन सब्सिडी को लेकर व्यापक सुधार करने की तैयारी कर रही है।
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इसके तहत एलपीजी और केरोसिन की कीमतों में हर माह वृद्धि कर सब्सिडी की अदायगी का प्रस्ताव है। इसके अलावा, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) रूट के जरिए पूरी तरह सब्सिडी भुगतान वित्त वर्ष 2015-16 से लागू किया जा सकता है।

एलपीजी और केरोसिन पर सरकार करीब 80,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का भुगतान करती है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली पेट्रोलियम सेक्टर में सुधारों को गति देने के इच्छुक हैं।
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वह लक्षित जनसंख्या तक सब्सिडी की पहुंच सुनिश्चित कर इसे कम करना और इसका दुरुपयोग रोकना चाहते हैं, जैसाकि पिछले कई दशकों से होता आ रहा है।
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हर माह बढ़ेगे गैस और केरोसिन के दाम?

माना जा रहा है कि इस संबंध में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने सरकार को प्रस्ताव सौंपे हैं। इसमें कंपनियों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए दिए जा रहे केरोसिन और एलपीजी सिलेंडरों में सब्सिडी के हिस्से को तर्कसंगत बनाने की बात कही है।

तेल विपणन कंपनियां और पेट्रोलियम मंत्रालय आने वाले वर्षों में अंडर रिकवरी कवर करने के लिए एलपीजी की कीमतों में 10 से 15 रुपये और केरोसिन के दाम में 50 पैसे से एक रुपये प्रति माह बढ़ोतरी किए जाने के पक्ष में पूरी तरह नजर आ रहे हैं।

माना जा रहा है कि तेल कंपनियां और पेट्रोलियम मंत्रालय दोनों एलपीजी पर बढ़ते सब्सिडी के दबाव को कम करना चाहते हैं। 2013-14 के दौरान एलपीजी का सब्सिडी बिल करीब 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था और चालू वित्त वर्ष में यह 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसी तरह, केरोसिन पर सब्सिडी व्यय करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है, जिसे अलाभकारी बताया जा रहा है।

1 नंवबर से गैस होगी महंगी

एनडीए सरकार ने 1 नवंबर से गैस की कीमतें 4.2 डॉलर एमबीटीयू से बढ़ाकर 6.17 डॉलर एमबीटीयू कर दिया है, जिसकी हर छह माह पर समीक्षा की जाएगी। इस मूल्यवृद्धि से न केवल घरों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की कीमतों में होगी, बल्कि परिवहन और गैस आधारित बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल की जाने वाली सीएनजी भी महंगी होगी।

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए फार्मूले के मुताबिक गैस की कीमतों में वृद्धि ग्रास कैलोरिफिक वैल्यू के आधार पर 5.61 डॉलर एमएमबीटीयू और शुद्ध कैलोरिफिक वैल्यू के मुताबिक 6.17 डॉलर बैठती है।

नेचुरल गैस कीमतों में बढ़ोतरी के चलते सीएनजी के दाम 4.25 रुपये प्रति किलो और पाइप्ड कूकिंग गैस के भाव 2.6 रुपये बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, गैस से उत्पादित बिजली के दाम करीब 90 पैसे प्रति यूनिट और उर्वरक उत्पादन की लागत करीब 2,720 रुपये प्रति टन बढ़ेगी।
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गैस सिलेंडर पर 404 रुपए प्रति सिलेंडर सब्सिडी

पेट्रोलियम मंत्रालय डीजल मॉडल को लागू करने के पक्ष में है और एलपीजी और केरोसिन की दरों में हर माह वृद्धि के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। एलपीजी पर मौजूदा सब्सिडी 404 रुपये प्रति सिलेंडर (14.2 किलो) और केरोसिन पर 31 रुपये प्रति लीटर है। मंत्रालय के मुताबिक फ्यूल सब्सिडी सरकारी खजाने पर सबसे बड़ा बोझ है।

सरकार 2015-16 तक पूरे देश में डीबीटी योजना लागू करने की दिशा में काम कर रही है और सब्सिडी हासिल करने के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा।

उपभोक्ताओं को अपने बैंक खाते सब्सिडी भुगतान से जोड़ने और तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकृत कराने का कहा जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीबीटी को पूरी तरह लागू करना प्रस्तावित है और जिन उपभोक्ताओं ने तेल कंपनियों के साथ सब्सिडी भुगतान को लिंक नहीं कराएंगे उन्हें सब्सिडी नहीं मिलेगी। प्रत्येक व्यक्ति को सीधे बाजार भाव से सिलेंडर लेना होगा और सब्सिडी का भुगतान ग्राहक के खाते में सीधे की जाएगी।
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