गुजरात विधानसभा चुनाव में हैट्रिक लगाने वाले नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हैं, जिनसे लोग चाहें प्यार करें या नफरत लेकिन कोई उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता है। मोदी 2014 के आम चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए तगड़े दावेदार भी हैं।
62 वर्षीय पूर्व आरएसएस प्रचारक ने राज्य में विकास को प्राथमिकता दी लेकिन 2002 में गोधरा के बाद हुए गुजरात दंगों के दाग ने उनका पीछा अभी तक नहीं छोड़ा है। मोदी ने 2002 में केशुभाई पटेल की जगह पर राज्य की सत्ता संभाली थी। गुजरात को संघ परिवार के हिंदुत्व की प्रयोगशाला माना जाता रहा है।
मोदी पर राज्य का सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करने का भी आरोप लगता रहा है। वर्तमान समय में विरोधियों ने सबसे अधिक उन पर ही हमला किया है। हालांकि पार्टी के अंदर और बाहर समान ही उनके प्रशंसकों की एक फौज है।
हाल के सालों में मोदी ने भाजपा से दूर खड़े मुस्लिमों को भी लुभाने की कोशिश की लेकिन इसमें उन्हें खास सफलता नहीं मिल पाई। कुछ महीने पहले मोदी ने इंटरव्यू में कहा था कि यदि वह दंगों में शामिल होने के दोषी हैं तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाए। पिछले 11 साल से मुख्यमंत्री पद पर काबिज मोदी गुजरात के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में भी काफी लोकप्रिय हैं।
बेहद साधारण परिवार में जन्में मोदी अविवाहित हैं। छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे। उन्होंने पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में रहकर काम किया फिर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथयात्रा में लालकृष्ण आडवाणी के सारथी रहे मोदी पहले भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री फिर महामंत्री बने। केशुभाई पटेल के इस्तीफे के बाद उन्हें गुजरात की कमान सौंपी गई। तब से लेकर अब तक वे तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद मुख्यमंत्री बने हुए हैं।