'लव गुरु' मटुकनाथ और जूली शायद आपको याद हों। पटना में प्रोफेसर रहे अधेड़ उम्र के मटुकनाथ ने अपनी ही छात्रा जूली से प्यार किया और फिर घर परिवार छोड़ कर दोनों एक दूसरे के हो गए।
विज्ञापन
मटुकनाथ और जूली को परिवार और समाज से खूब प्रताड़ना मिली लेकिन फिर भी दोनों ने हार नहीं मानी। मटुकनाथ की धर्मपत्नी आभा चौधरी पिछले साल साल से निर्वासित जिंदगी जी रही हैं।
वे 2007 से पति से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। छह महीने से उनका मामला आर्डर पर चल रहा था। अब फैसला सुना दिया गया है, यह घरेलू हिंसा कानून में नए तरह का फैसला है।
विज्ञापन
'लव गुरु' को मिला कोर्ट से झटका
बिहार में 'लव गुरु' के नाम से चर्चित पटना विश्वविद्यालय के बी एन कॉलेज के हिन्दी के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी को स्थानीय निचली अदालत ने झटका दिया है।
अपने से आधी से भी कम उम्र की जूली के साथ 'लिव इन रिलेशनशिप' में जीवन गुजार रहे प्रो. मटुकनाथ चौधरी को अदालत ने उनकी पत्नी आभा चौधरी को भरण-पोषण के लिए हर महीने पंद्रह हजार रुपये देने का निर्देश दिया है।
अभी तक प्रोफेसर साहब अपनी पत्नी के उत्तरदायित्व से बच रहे थे, लेकिन मजिस्ट्रेट ने फिलहाल यह अंतरिम फैसला सुनाया है। हालांकि जीवनयापन भत्ते की राशि में बढ़ोतरी की भी संभावना है और पत्नी को मुकदमे में आए खर्च की राशि भी मिल सकती है।
रातों-रात सुर्खियां बन गए थे प्रो. मटुकनाथ
दरअसल, गुरु जी की धर्मपत्नी आभा 2007 से ही निर्वासित जिंदगी जी रही हैं। उस समय अपनी ही छात्रा जूली से प्रेम सम्बंधों और फिर तथाकथित शादी के बाद चर्चित हुए पटना विश्वविद्यालय प्रोफेसर मटुकनाथ रातों-रात सुर्खियां बन गए थे।
जूली के साथ प्रेम संबंध में पड़ने के बाद छात्रों के बीच उनका विरोध शुरू हो गया था। छात्रों से होते हुए जब यह विरोध उनके घर के अंदर पहुंचा तो बवाल शुरू हो गया।
एक दिन अचानक उनकी पहली पत्नी आभा चौधरी ने गुरु जी की प्रेमलीला पकड़ ली और शुरू हो गई मारपीट। इस दौरान आभा चौधरी ने दोनों के चेहरे पर कालिख भी पोत दी।
विरोध के बावजूद एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा
लेकिन, कहते है ना की प्रेम सचमुच अंधा होता है। तमाम विरोधों के बावजूद मटुकनाथ और जूली ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। यहां तक की इस कदम के बाद पटना विश्वविद्यालय ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया।
पटना विश्वविद्यालय ने 15 जुलाई, 2006 को मटुकनाथ को बी एन कॉलेज के हिंदी विभाग के रीडर पद से निलम्बित कर दिया। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
उन पर अपनी कक्षा में बाहरी लोगों को बैठाने व अमर्यादित आचरण करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मटुकनाथ ने इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर कुलापति तक न्याय की गुहार लगाई।
प्रेमिका के साथ आमरण अनशन पर बैठे
जब गुरु जी को कही न्याय नहीं मिला तो पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। इस बीच वे जूली के साथ इस मामले को लेकर पटना के कारगिल चौक पर आमरण अनशन पर बैठे गए।
नवंबर 2011 में आमरण अनशन के बाद राज्य सरकार ने गुरु जी की बर्खास्तगी का आदेश वापस ले लिया। राजभवन ने पटना विश्वविद्यालय को उनकी बहाली का निर्देश जारी किया।
इसके बाद गुरु जी की प्रेमिका जूली ने उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया| अनशन तोड़ने के बाद 'लव गुरु' नाम से चर्चित मटुकनाथ ने कहा कि उन्हें लम्बे समय के बाद न्याय मिला है और यह लोकतंत्र की जीत है।
अभी कुछ दिन पहले गुरु जी ने अपने गांव जयरामपुर में एक ‘लव स्कूल’ खोला है। इस स्कूल के बारे में वे कहते हैं कि प्यार हमें रचनात्मक बनाता है। प्यार का मतलब है बलिदान, इसमें स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं होती।
प्यार के दो चेहरे होते हैं- पहला विध्वंसात्मक होता है और दूसरा रचनात्मक। दुख की बात है कि आज के युवा प्यार के सही तरीके को नहीं पहचान पा रहे। हम उन्हें सिखाएंगे कि कैसे सर्वोच्च बलिदान करते हुए समाज के लिए उदाहरण पेश किया जाए और कैसे रचनात्मक प्यार किया जाए।
मटुकनाथ ने इस स्कूल को मान्यता दिलाने के लिए सीबीएसई में आवेदन भी किया है। मटुकनाथ के अनुसार इस जीवन जागृति पाठशाला में जूली केन्द्रीय भूमिका में होंगी और उन्हें स्कूल की माता बनाया जाएगा। गांव के लोग भी इसके लिए तैयार हैं।