लॉटरी पर अंकुश लगाने के नियमों की धता बताकर धड़ल्ले से इंटरनेट पर जारी इसके गैरकानूनी खेल पर सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकारों को कड़े कदम उठाने को कहा है।
ई-लॉटरी और लॉटरी की बिक्री के खिलाफ दायर एक अवमानना याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि यह गैरकानूनी खेल जारी नहीं रहना चाहिए। राज्य सरकारों और प्राधिकारों को इसके खिलाफ समुचित कदम उठाने चाहिए।
सर्वोच्च अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ता सत्यवीर सिंह को फिलहाल इस मामले में पहले राज्यों को शिकायत नोटिस भेजने। मुख्य सचिवों से मिलकर इस संबंध में जानकारी देने को कहा है।
साथ ही राज्य के शीर्ष अधिकारियों को ताकिद कर दिया है कि सिंह की शिकायत को गंभीरता से लें और तत्काल कदम उठाएं।
सिंह के मुताबिक लॉटरी के लिए केंद्र सरकार ने 1998 में लॉटरीज (नियमन) अधिनियम बनाया था। सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में राज्य सरकारों को इसी अधिनियम के प्रावधानों के तहत इस व्यवसाय को व्यवस्थित करने को कहा था।
लेकिन दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगण सहित कई राज्यों में नियमों की धता बताकर बदस्तूर ई-लॉटरी और लॉटरी की बिक्री जारी है। यह लॉटरियां एक और दो अंक के आधार पर चल रही हैं।
अवमानना याचिका में कहा गया है कि कानून के मुताबिक एक या दो अंक के आधार पर लॉटरी के निर्णय नहीं जारी किए जा सकते। इसके बावजूद ऐसा बदस्तूर जारी है।
याद रहे कि इस मसले पर सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में सख्ती से कहा था कि केंद्र सरकार केनियमों के मुताबिक राज्य सरकारें इस व्यवसाय का चलन सुनिश्चित करें।
याचिका में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली, पंजाब, मेघालय, नागालैंड अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और हरियाणा को शीर्षस्थ अदालत के आदेश का अनुपालन न करने की तोहमत लगायी गई थी।
गौरतलब है कि लॉटरी व्यवसाय पर राज्य सरकारों की लापरवाही के खिलाफ सिंह ने 2008 में शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की थी।
अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकारों से जवाब तलब किया था। राज्यों की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद अदालत ने आदेश जारी कर इस मुद्दे का निपटारा कर दिया था।