आरटीआई द्वारा प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश सरकार ने अपने बजट में किसानों के साथ इस बार भी छल किया है। किसानों के लिए सिर्फ दस हजार करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया है। जबकि जीएसडीपी के कृषि क्षेत्र से प्राप्त आय में से सिर्फ 33 फीसदी ही केंद्र और राज्य स्वायत्त निकाय के लिए ही खर्च किया जा सकता है।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश का कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में कृषि का 22 फीसदी हिस्सा है। एक तिहाई हिस्सा सरकार चलाने के लिए खर्च किए जाने का प्रावधान है। खेती का हिस्सा बजट का 15 फीसदी होना चाहिए था।
जबकि केंद्र हो या राज्य सरकारें कृषि एवं संबद्ध क्रियाकलापों पर सिर्फ 3 से 4 फीसदी ही खर्च करती चली आ रही हैं। कृषि के हिस्से वाली राशि का चौथा या पांचवां हिस्सा अन्य क्षेत्रों जैसे उद्योग या सेवा क्षेत्र पर खर्च हो रहा है। इससे कृषि क्षेत्र घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
प्रदेश सरकार के बजट पर सवाल
प्रदेश सरकार ने 3,46,935 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया है। इसका 15 फीसदी हिस्सा जो कृषि क्षेत्र के लिए है। यह 50,000 करोड़ रुपए बैठता है। इसमें 10,000 करोड़ ही कृषि क्षेत्र के लिए रखा गया है। 40,000 हजार करोड़ अन्य क्षेत्र पर खर्च के लिए दिया गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बीते छह दशकों से कृषि क्षेत्र से यह कटौती होती चली आ रही है।
कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी में कटौती घातक
कृषि मामलों के आरटीआई कार्यकर्ता और सीमांत व छोटे किसान बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष चौधरी शिवराज सिंह कहते हैं कि कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी में लगातार कटौती घातक है। इससे देश का कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।
इसीलिए आत्महत्या कर रहे हैं कर्जदार किसान
कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी में लगातार कटौती से ही किसान कर्जदार होते जा रहे हैं। मौजूदा समय में देश के 8.5 लाख करोड़ किसान कर्जदार हैं। अकेले यूपी में ही 93212 करोड़ किसान कर्जदार हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सरकारें इन्हें राहत पहुंचाने के नाम पर कर्ज उपलब्ध कराने की योजनाएं बना रही हैं। बिना कर्ज किसानों को राहत उपलब्ध कराने की कोई योजना दरअसल नहीं बन रही है।
2014-15 में उप्र की जीएसडीपी पर एक नजर
कृषि क्षेत्र से आय --- 2,58,853.80 करोड़
उद्योग क्षेत्र से आय --- 2,37,066.82 करोड़
सेवा क्षेत्र से आय --- 4,61,624.65 करोड़
(महाराष्ट्र के बाद देश की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था यूपी की है)
जीएसडीपी के अनुसार कृषि क्षेत्र से सालाना कटौती
वर्ष --- कृषि क्षेत्र (फीसदी) --- उद्योग क्षेत्र (फीसदी) --- सेवा क्षेत्र (फीसदी)
1970-71 --- 58.4 --- 89 --- 32.7
1980-81 --- 52 --- 9.7 --- 38.3
1990-91 --- 42 --- 13.9 --- 44
2000-01 --- 35.5 --- 21.7 --- 42.8
2010-11 --- 23.9 --- 37.4 --- 52.8
2013-14 --- 22.9 --- 20.6 --- 56.5
(स्रोत: कृषि मंत्रालय से आरटीआई द्वारा प्राप्त आंकड़े)