यूपीए सरकार ने कुछ संशोधनों के साथ बहु-प्रतिक्षित लोकपाल बिल को मंजूरी दे दी है। लोकपाल बिल को लेकर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट पर गुरुवार को कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई। बिल में किए गए संशोधन को बैठक में मंजूरी दे दी गई। बिल को अब संसद के आगामी बजट सत्र में राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक लोकपाल बिल में सीबीआई को लोकपाल के अधीन नहीं रखा गया है। बिल में राजनीतिक दलों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकारी फंड लेने वाले ट्रस्ट और शिक्षण संस्थान भी लोकपाल के दायरे में नहीं होंगे। इसी के साथ केस चलाने की मंजूरी देने से पहले सरकार आरोपी का पक्ष सुनेगी।
गौरतलब है कि लोकपाल बिल पहले लोकसभा में पास हो गया था, लेकिन बाद में राज्य सभा में अटक गया था। सरकार ने इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास विचार के लिए भेज दिया था। राज्यसभा की सलेक्ट कमेटी के तमाम सुझावों को इस लोकपाल बिल में शामिल किया गया है।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट में किसी तरह के फेरबदल या सुधार को लेकर सरकार को चेताया है। भाजपा का कहना है कि लोकपाल बिल पर बनी रिपोर्ट में सभी दलों की सहमति है, इसलिए अब इसमें किसी भी तरह के फेरबदल या सुधार को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होंगे।
वहीं, वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक को एक ड्रामा करार दिया। अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीयत और मंशा साफ नहीं है। अन्ना ने सरकार के लोकपाल बिल से असहमति जताई है।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल ने लोकपाल बिल की मंजूरी पर कहा कि यह दुनिया की पहली ऐसी भ्रष्टाचार निरोधी संस्था होगी, जिसके पास जांच करने का अधिकार नहीं होगा, यह महज एक और संस्था की तरह होगी। यूपीए सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि एक कमजोर बिल को मंजूरी देकर केंद्र सरकार पूरे देश को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है।