भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त औजार के रूप में आखिरकार साढ़े चार दशक (करीब 46 साल) बाद अब देश को लोकपाल कानून मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
राज्यसभा के बाद बुधवार को लोकसभा ने भी संशोधित लोकपाल बिल को हरी झंडी दिखा दी। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही लोकपाल कानून अस्तित्व में आ जाएगा।
इसके बाद सरकार लोकपाल की तलाश में भी जुट जाएगी। हालांकि माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार ही लोकपाल की नियुक्ति कर पाएगी क्योंकि कानून बन जाने के बाद सरकार को अब इसकी नियमावली व ढांचा तैयार करने के लिए कुछ समय चाहिए।
लोकसभा में बुधवार को सपा और शिवसेना के विरोध व वाकआउट के बीच सदन ने एकमत से इस संशोधित बिल को मंजूरी दे दी।
लोकसभा ने हालांकि 2011 में ही लोकपाल बिल को हरी झंडी दिखा दी थी, लेकिन राज्यसभा में जाने के बाद इसे सलेक्ट कमेटी को सौंप दिया गया। अब सलेक्ट कमेटी की सभी सिफारिशों के साथ इस संशोधित बिल पर भी लोकसभा ने अपनी मुहर लगा दी।
हालांकि इस दौरान कांग्रेस के कुछ सदस्यों समेत सीमांध्र क्षेत्र के कई दलों के सदस्य स्पीकर के आसन के करीब आकर लगातार नारेबाजी करते रहे। लोकपाल कानून को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मील का पत्थर बताया है।
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने बिल को पारित कराने का श्रेय समाज सेवी अन्ना हजारे को दिया। उन्होंने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि बिल के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को श्रेय देने की कोशिश हो रही है।
सुषमा ने कहा कि हकीकत यह है कि अनशन पर बैठे बुजुर्ग तपस्वी के प्रयासों तथा जनता के दबाव में सरकार यह बिल पारित करने पर विवश हुई है।
इसके बाद राहुल गांधी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के समय की पहल को कानून में तब्दील करके इतिहास बनाने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि लोकपाल ही अकेले भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए काफी नहीं है। इसके लिए भ्रष्टाचार रोधी व्यापक संहिता की जरूरत है। यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार रोधी ढांचा तैयार किया है।
सरकार ने आरटीआई लाकर भ्रष्टाचार पर पहली बड़ी चोट की थी। राहुल ने कहा कि लोकपाल भ्रष्टाचार रोधी ढांचे का हिस्सा है। अब भी भ्रष्टाचार रोधी छह बिल भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन, सिटीजन चार्टर, सार्वजनिक खरीद, विदेशी रिश्वत, न्यायिक जवाबदेही और व्हिसल ब्लोअर बिल संसद में लंबित हैं।
उन्होंने इन्हें पारित कराने के लिए सत्र की अवधि बढ़ाने की वकालत भी की। लोकपाल का श्रेय लेने और छीनने की इस होड़ पर चर्चा में शिरकत कर रहे सदन में बसपा के नेता दारा सिंह चौहान ने कहा कि श्रेय लेने की यह कोशिश भी एक तरह का भ्रष्टाचार है।
वास्तव में लोकपाल का श्रेय किसी को जाता है तो वह भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करती रही देश की आम जनता को जाता है। बिल का विरोध कर रही सपा के नेता मुलायम सिंह यादव की दलील थी कि इस कानून से सरकारी कामकाज ठप पड़ जाएगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी का निर्वाह करने में डरेंगे।
इससे नौकरशाही में भय फैलेगा और कोई भी अधिकारी किसी दस्तावेज पर न तो फैसला करेगा और न ही दस्तखत करेगा। मुलायम ने कहा कि कानून के मुताबिक एक दरोगा प्रधानमंत्री की जांच करेगा।
उन्होंने सदन में मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की ओर मुखातिब होते हुए इस विधेयक को आगे बढ़ाने से रोकने का आग्रह किया।
जबकि जदयू नेता शरद यादव ने बिल का समर्थन तो किया लेकिन प्रधानमंत्री को लोकपाल के तहत लाने के प्रावधान पर आपत्ति भी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से प्रधानमंत्री की जवाबदेही संसद के प्रति नहीं होगी बल्कि कहीं और होगी।
बिल में प्रमुख प्रावधान
केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति की जाएगी
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य होंगे
लोकपाल के आधे सदस्य एससी/एसटी/ओबीसी, अल्पसंख्यक समुदाय से होंगे
लोकपाल का चयन प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, लोकसभा में विपक्ष की नेता, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक जज, प्रमुख न्यायविद की समिति करेगी
लोकपाल की जांच के दायरे में प्रधानमंत्री भी होंगे
विदेश से साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का दान हासिल करने वाली संस्थाएं इसके दायरे में होंगी
जिन मामलों को लोकपाल सीबीआई व अन्य एजेंसियों को जांच के लिए सौंपेगा, उनमें वह निगरानी करने के साथ ही निर्देश भी दे सकेगा।
इसमें ईमानदार नौकरशाहों को दिया गया है संरक्षण
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति सीबीआई निदेशक का चयन करेगी
किसी मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों का तबादला लोकपाल की मंजूरी से ही संभव होगा
भ्रष्ट तरीके से कमाई पर संपत्ति, आय को जब्त करने का अधिकार होगा।
जनलोकपाल------
न्यायपालिका भी लोकपाल के दायरे में हो
भ्रष्टाचार का खुलासा करने वालों को भी संरक्षण दिया जाए
झूठी शिकायत करने वालों पर सिर्फ जुर्माना लगाया जाए, उन्हें जेल में नहीं डाला जाए
भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत सीबीआई के मामले लोकपाल के तहत आएंगे
नागरिक चार्टर में शामिल कर्तव्यों का पालन नहीं करने पर सरकारी कर्मचारियों पर मामला दर्ज किया जाए
अन्ना की मुहिम रंग लाई
मजबूत लोकपाल कानून को लेकर कई बार अनशन करने वाले अन्ना हजारे की मुहिम आखिरकार रंग लाई।
बुधवार को लोकसभा में लोकपाल बिल पास होते ही अन्ना ने 9वें दिन अपना अनशन तोड़ दिया। खुशी का इजहार करते हुए अन्ना ने घोषणा कि वह साफ सुथरे लोगों को शामिल कर एक निगरानी संस्था बनाएंगे जोकि कानून के अमल पर नजर रखेगी।
अन्ना ने हालांकि चेताया कि मात्र कानून बनने से ही भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पाएगी। सही ढंग से कानून अमल में नहीं आने से यह व्यर्थ साबित होगा।