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LS में GST बिल को मंजूरी, राज्यसभा में क्या होगा?

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नरेंद्र मोदी सरकार के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में से एक वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) बिल ने पहली बाधा पार कर ली है। बुधवार को कांग्रेस के वाकआउट के बीच लोकसभा में बिल को मंजूरी मिल गई।
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कांग्रेस बिल को संसद की स्थायी समिति को भेजने के पक्ष में थी लेकिन उसे इसमें कामयाबी नहीं मिली। इस अहम बिल की अगली परीक्षा राज्यसभा में 8 मई को होगी, जहां इसे चर्चा के बाद मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। उच्च सदन में एनडीए के पास बहुमत नहीं है और अगर सरकार को इसे अप्रैल 2016 तक लागू करना है तो उसे कांग्रेस के समर्थन की जरूरत होगी।

राज्यसभा में समर्थन के एवज में कांग्रेस बिल में अपने मुताबिक संशोधन करा सकती है। अगर सौदेबाजी नाकाम रहती है तो वह बिल के खिलाफ वोट डाल सकती है। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी बिल का समर्थन करती है लेकिन इसे संसद की समीक्षा की जरूरत है। साफ है उनका इशारा बिल को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की ओर था।
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राज्यसभा में कैसे पास होगा बिल?

बुधवार में लोकसभा में जीएसटी के प्रावधानों में संशोधनों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के सदस्य सदन से बाहर चले गए। इस बीच, लोकसभा के 352 सदस्यों ने प्रावधानों के पक्ष में वोट दिया जबकि 32 ने इसके खिलाफ मतदान किया।

बिल पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के जवाब के बाद मत विभाजन हुआ। जेटली ने अपने जवाब में कहा कि बिल में वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करने और इसका निर्माण करने वाले राज्यों यानी दोनों के हितों का ख्याल रखा जाएगा।

हालांकि विपक्ष ने इस अहम बिल के संवैधानिक संशोधनों पर वोटिंग के दौरान लोकसभा में पीएम की गैरमौजूदगी की आलोचना की। यह बिल इस मायने में अहम है कि इससे वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स खत्म कर एक ही टैक्स लगाया जाएगा। और पूरे भारत में वस्तओं और सेवाओं की कीमत लगभग एक होगी। लेकिन इसे दोनों सदनों के दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी।

इससे पहले जेटली ने कहा कि जीएसटी बिल एक से दूसरी स्थायी समिति तक घूमता नहीं रह सकता। कांग्रेस बिल में उन्हीं परिवर्तनों की मांग कर रही है जिनकी 2011 में एक संसदीय समिति समीक्षा कर चुकी है। न तो केंद्र और न ही राज्य सरकारें जीएसटी की ऊंची दरों के पक्ष में है। इनसे लोगों को नुकसान पहुंचेगा।
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राज्यसभा में सरकार का बहुमत नहीं

प्रस्तावित जीएसटी में राज्य और केंद्र की लेवी को मिलाकर ऐसी दर निर्धारित की जाएगी, जो मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार मिटाने में मददगार होगी। एक सरकारी थिंक टैक ने 27 फीसदी जीएसटी दर की सिफारिश की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय औसत 16.4 प्रतिशत है।

हालांकि जेटली ने 27 फीसदी को काफी ऊंची दर बताया है। बिल पर अपनी राय जताते हुए केपीएमजी इंडिया के अप्रत्यक्ष कर पार्टनर संतोष दलवी ने कहा कि लोकसभा में बिल का पारित होना अहम सफलता है लेकिन इसे लागू करने के लिए अभी कई तैयारियां करनी होगी।

बाधा बरकरार
बिल के सामने राज्यसभा में कड़ी चुनौती
कांग्रेस चाहती है अपने मुताबिक संशोधन
सरकार, संसदीय समिति को भेजने को तैयार नहीं

सरकार का पक्ष
संसदीय समिति 2011 में समीक्षा कर चुकी है
बिल सामूहिक, न तो यूपीए और न एडीए का
जीएसटी में उपभोक्ता और निर्माता दोनों राज्यों का हित

अभी कई तैयारियां बाकी
जीएसटी लागू करने के लिए अभी तैयारियों की जरूरत
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