लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में प्रत्याशियों के ऐलान, गठबंधन करने, तोड़ने से लेकर रैलियां करने की सरगर्मी तेज हो गई है। निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग भी पूरी तरह से तैयार है।
इस बार लोकसभा चुनाव सात चरणों में कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही देश सबसे लंबी अवधि में चुनाव कराए जाने का गवाह बन सकता है। मतदान प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे हफ्ते से प्रारंभ होकर मई महीने में संपन्न होगी।
सात चरणों में होंगे चुनाव
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा इसी हफ्ते के मध्य में किए जाने की संभावना है। तिथियों के ऐलान के साथ सरकारों और राजनीतिक दलों के लिए चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी।
चुनाव आयोग में सूत्रों के मुताबिक, मतदान के पहले चरण की संभावित तिथि 7 से 10 अप्रैल के बीच की है। हालांकि मतदान कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अभी तक की योजना के अनुसार मतदान सात चरणों में कराया जाना है लेकिन इसे घटाकर 6 चरणों में लाने की कोशिश की जा रही है। इस बार के आम चुनाव में 81 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
31 मई तक संपन्ना हो जाएंगे चुनाव
वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 1 जून को खत्म हो रहा है और नए सदन का गठन 31 मई तक हो जाना है। गर्मियों से बचने के लिए चुनाव कार्यक्रम को पहले करने की राजनीतिक पार्टियों की मांग को चुनाव आयोग पहले ही खारिज कर चुका है।
लोकसभा चुनाव कराने की तैयारियों को लेकर चुनाव आयोग केंद्रीय गृहमंत्रालय, प्रदेश सरकारों, पैरामिलिट्री बलों और प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ बातचीत पूरी कर चुका है। आयोग मतदान कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में पहले चुनाव
चुनाव आयोग की योजना पहले चरण में नक्सल प्रभावित राज्यों और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में मतदान कराने की है, जिससे सुरक्षा बलों की उपलब्धता आसानी से हो सके।
यदि 6 या 7 चरणों में मतदान कराने का निर्णय लिया जाता है तो यह देश के संसदीय चुनाव की सबसे लंबी अवधि होगी। इससे पहले 2009 में 5 चरणों में चुनाव कराए गए थे। उस वक्त 16 अप्रैल से 13 मई के बीच चुनाव संपन्न कराया गया था।
कई नई शुरूआत होंगी चुनावों में
संसदीय चुनाव में पहली बार प्रयोग के तौर पर कुछ सीटों पर इलेक्ट्रानिक वोटिंग के लिए पेपर ट्रायल सिस्टम शुरू किया जाएगा। यह प्रयोग अदालतों में बढ़ती चुनाव याचिकाओं और विवादों से बचने के लिए अपनाया जाएगा।
81.4 करोड़ मतदाता करेंगे अपने मताधिकार का प्रयोग
9.71 करोड़ नए मतदाता पिछली बार के चुनाव के बाद पंजीकृत
1.1 करोड़ मतदान कर्मी लगाए जाएंगे, जिसमें आधे सुरक्षा बलों के जवान होंगे
8 लाख करीब मतदान केंद्र बनाए जाएंगे पूरे देश में
12 लाख के आसपास इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन होंगी
2.5 लाख अतिरिक्त नई ईवीएम का आर्डर भी दिया गया
70 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे बड़े राज्यों में लोकसभा प्रत्याशी
साथ में विधानसभा चुनाव भी
चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव के साथ ही ओडिशा, सिक्किम और आंध्र प्रदेश समेत नवगठित तेलंगाना में भी चुनाव करा सकता है। आंध्र प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 2 जून, ओडिशा का 7 जून और सिक्किम में 21 मई तक है।