ऊर्जा एवं गैस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में रोड़ा अटकाने वाली कुछ आयात लॉबियों की ओर से सभी पेट्रोलियम मंत्रियों को धमकाने का सनसनीखेज खुलासा खुद पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली की ओर से होने के बाद तेल उद्योग से जुड़े कई वरिष्ठ कर्मियों ने भी इसे स्वीकार किया है।
कहा जा रहा है कि भारत को तेल व प्राकृतिक गैस निर्यात करने वाली अंतरराष्ट्रीय लॉबियों का दबदबा केंद्र समेत अलग-अलग तरीके से तमाम राज्य सरकारों पर भी है।
जानकार यह भी मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तमाम मंत्रालयों पर लॉबिस्टों का दबाव बरकरार है। पेट्रोलियम के अलावा कोयला, बिजली और उर्वरक जैसे मंत्रालय भी इससे अछूते नहीं हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्रालय पर इंपोर्ट लॉबी के बढ़ते दबाव की बात सही है। यह दबाव कई अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक मंत्रालयों पर भी है।
फिलहाल घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से 80 फीसदी तेल और गैस का आयात किया जाता है। इसलिए मोइली घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में है।
इसके लिए गैस की कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाना जरूरी है। लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय लॉबी देश में गैस उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इस वजह से मंत्रालय पर दबाव ज्यादा बढ़ गया है।
कई मंत्रालयों में उद्यमी व्यक्तिगत रूप से अपने संपर्क साधते हैं। इससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
तनेजा ने कहा कि कोयला, बिजली और उर्वरक मंत्रालयों में भी लॉबींग करने वालों का दबदबा है।
ओएनजीसी के पूर्व चेयरमैन आर एस शर्मा ने मोइली के वक्तव्य पर अपनी सहमति जताई है। उनका कहना है कि कुछ लॉबी देश में प्राकृतिक गैस की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। जबकि कई गैस उत्पादन की कीमत बढ़ाने को तैयार नहीं है।
उनका दबाव मंत्रालय पर जरूर पड़ रहा है। उनके निजी हितों से देश की अर्थव्यवस्था तक प्रभावित हो रही है। लेकिन घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कीमतों को बढ़ाना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक गैस की कीमत 4.2 प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 6.7 एमएमबीटीयू करने के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रस्ताव पर अगले हफ्ते कैबिनेट में कोई निर्णय लिया जा सकता है।
लेकिन मोइली के इस पक्ष का बिजली मंत्रालय और उर्वरक व रसायन मंत्रालय ने पुरजोर विरोध किया था। जबकि इस संदर्भ में शरद पवार समेत कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्री पहले ही अपनी नाराजगी जता चुके हैं।