विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हुई पोस्टर जंग में टिकट मांगने वाले नेताओं के पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स से अटल और आडवाणी की तस्वीर गायब हैं।
जो नेता टिकट दिलाने में जितना सहायक हो सकता है, उसकी पिक्चर को उस क्रम व साइज में जगह दी गई है।
भाजपा लोकसभा या विधानसभा चुनाव में अभी भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुए कार्यों को गिनाकर वोट बटोरने की कोशिश करती है।
पूर्व उपप्रधानमंत्री व वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी चार माह पहले राजधानी के नेताओं के लिए महान थे, लेकिन अब उनकी आस्था अचानक बदल गई है।
टिकट दिलाने वालों का गुणगान
दरअसल, इस समय सबसे ज्यादा पोस्टर व होर्डिंग वार विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की लाइन में खड़े नेताओं ने छेड़ी हुई है। 70 सीटों पर सैकड़ों की संख्या में लाइन में लगे दावेदारों को साफ नजर आ रहा है कि इस बार टिकट दिलवाने वाले चेहरे बदले हुए हैं, इसलिए उन्हीं का गुणगान किया गया।
वरिष्ठ नेताओं से साधी चुप्पी
हालांकि, टिकट मिलने के बाद उन्हें अटल और आडवाणी के नाम पर ही वोट भी बटोरने हैं। दोनों नेताओं को पिक्चर से गायब करने पर वरिष्ठ नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इतना ही नहीं भाजपा के प्रदेश मुख्यालय पर टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के होर्डिंग्स का भी यही हाल है। यहां प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश भाजपा के प्रभारी गडकरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को जगह मिली हुई है।
पहले भी हटे नेताओं के फोटो
ताज्जुब की बात यह भी है कि कई स्थानों पर चुनाव सहप्रभारी नवजोत सिंह सिद्धू को जगह मिली है। हालांकि, जगह नेताओं की वरिष्ठता को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि टिकट दिलाने में मददगार के तौर पर तय हुई है। यह पहला मामला नहीं है जब ऐसा हुआ हो। दो दशक पहले पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना समेत अन्य नेताओं के फोटो पोस्टरों से हटते व जुड़ते रहे हैं।
"अटल और आडवाणी हमारे सर्वोच्च नेता हैं। उनके आशीर्वाद के बगैर पार्टी कार्यकर्ता कोई काम नहीं करते हैं। ऐसा नहीं है कि वे पोस्टर से गायब हैं। अटल जी कार्यकर्ताओं के दिल में बसे हुए हैं।"
- विजेंद्र गुप्ता, चुनाव समिति सदस्य व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष