गुरु पूर्णिमा पर देश-दुनिया के मानस प्रेमियों, भक्तों के लिए ज्ञान की नगरी काशी से बड़ी खुशखबरी है। पहली बार गुरु पूर्णिमा पर गोस्वामी तुलसी दास की साढ़े पांच सौ साल पुरानी गद्दी के दर्शन घर बैठे मिलेंगे।
542 साल पुरानी संत तुलसी की गद्दी पर रखी उनकी खड़ाऊं, वह जिस नाव की सवारी करते थे, उसका अंश और उनकी हस्तलिखित राम चरित मानस की पोथी का वेब टेलिकास्ट किया जाएगा।
गुरु पर्व पर विश्व भर के मानस प्रेमियों के लिए यह योजना अखाड़ा गोस्वामी तुलसी दास प्रबंधन ने बनाई है। काशी में गंगा के जिस तट पर संत तुलसी दास ने कभी श्रीरामचरित मानस के पहले अध्याय बालकांड की रचना की थी, वह गुरु गद्दी अब अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के नाम से जानी जाती है।
उस गद्दी पर संत तुलसी की हस्तलिखित मानस की पोथी आज भी सुरक्षित है। इसके अलावा उनकी खड़ाऊं और गंगा पार करने के लिए उनकी नाव के भी कुछ हिस्से संरक्षित हैं, जिनकी रोज पूजा की जाती है।