पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी दौरे में बड़ा मज़ा आ रहा है। इस क्षेत्र में गन्ने की फ़सल लहलहा रही है और गन्ने का रस पीते-पीते लंबी यात्राएं बेहद आसान हो रही हैं।
लेकिन गुरुवार को इस इलाक़े की एक रैली में हैरानी तब हुई जब वहां कम से कम पांच लोगों को नारेबाज़ी के बीच गन्ने का रस नहीं बल्कि शराब की चुस्कियां लेते हुए देखा।
हुआ यूं कि हमें देवबंद में सुबह-सुबह ख़बर मिली कि बागपत के सांसद और केंद्रीय मंत्री अजित सिंह अपने चुनाव क्षेत्र में रैली में भाग लेने पहुँच रहे हैं। हमने भी देवबंद से अपनी गाड़ी की दिशा बड़ौत से क़रीब 15 किलोमीटर दूर छपरौली नाम के इस इलाके़ की ओर मोड़ दी।
क़रीब 20 से 30 हज़ार की संख्या में अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के समर्थक वहां पहले से ही मौजूद थे। एक तरफ़ उनके आने में देरी की घोषणा हो रही थी तो दूसरी ओर ढोल नगाड़े बज रहे थे।
शराब की बोतल
क़रीब पांच लोग एक बड़ी सी शराब की बोतल लेकर एक मेज़ के चारों ओर विराजमान थे और शराब पीए जा रहे थे, तुरंत ज़ेहन में चुनाव आयोग की आचार संहिता दौड़ पड़ी जिसका उल्लंघन मेरी आंखों के सामने हो रहा था। मज़े की बात ये भी थी कि उन्हें किसी की परवाह भी नहीं थी।
जैसे ही 'छोटे चौधरी' के नाम से मशहूर अजित सिंह का हेलिकॉप्टर पीछे मैदान में उतरा, भीड़ का एक हिस्सा उन्हें लेने दौड़ पड़ा। लेकिन मंच के पीछे इन पांच लोगों के जाम चलते रहे। अजित सिंह मंच पर आए, उन पर गुलाल-अबीर फेंका गया और उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया।
अजित सिंह ने जहां जनता का अब तक के समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया, ढोल-नगाड़े बज उठे।
आचार संहिता
फिर देर किस बात की थी, इन पांच में से तीन उठे और शराब की बोतल हाथ में लेकर नाचने लगे।
इन्हें इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं थी कि चंद फीट की दूरी पर ही उनके 'छोटे चौधरी' एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे हैं।
मैंने जैसे ही इस तमाशे की तस्वीरें खींचनी शुरू की, मेरे पास तीन-चार हट्टे कट्टे राष्ट्रीय लोकदल समर्थकों ने आकर कहा, "फ़ोटो उड़ा दो, क्या फ़ायदा होगा?"
मेरे कैमरे में अजित सिंह की रैली भी आ चुकी थी और इन 'शराबियों' का 'नाच' भी। क़रीब पांच मिनट बाद ही राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकर्ताओं को इस बात का एहसास हुआ कि एक पत्रकार इस पूरे तमाशे की तस्वीरें ले रहा है और उन्होंने आकर इन व्यक्तियों को धकेलते हुए वहां से रफा-दफा कर दिया।
अपना सामान लेकर मैं मैदान के दूसरे छोर पर पहुंच गया। यही सोचते हुए कि ख़बर रैली नहीं, चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन है।