जम्मू कश्मीर में मुख्य विपक्षी दल पीडीपी ने राज्य सरकार से यूट्यूब और फेसबुक के इस्तेमाल पर लगी रोक हटाने की मांग की है। विपक्ष की नेता महबूबा मुफ्ती का कहना है कि अगर रोक नहीं हटाई गई तो सूबे के युवा अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं।
मुफ्ती ने प्रश्नकाल से पहले यह मुद्दा उठाया। मुफ्ती ने कहा कि इसलाम विरोधी फिल्म ने भारत समेत दुनिया भर के लोगों की भावनाएं आहत की हैं। इस फिल्म के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए लेकिन किसी राज्य ने यूट्यूब और फेसबुक को ब्लॉक नहीं किया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में मूवी के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन किए गए। इसके बावजूद यूट्यूब और फेसबुक को ब्लॉक करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राज्य सरकार ने सुरक्षा के नाम पर यूट्यूब, फेसबुक, आर्कुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दरअसल पिछले कई महीनों से फेसबुक राज्य में दुष्प्रचार का जरिया बन गया है। जानकारी के अनुसार जून 2010 में घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद सरकार द्वारा एसएमएस सेवा बंद करने के बाद कुछ लोगों ने फेसबुक के जरिए दुष्प्रचार व धर्मों के विरुद्ध आपत्तिजनक बात लिखी थी।
भाजपा की राष्ट्रीय एकता यात्रा के दौरान लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर फेसबुक पर कई ऐसी तस्वीरें दिखाई गईं, जिससे राज्य की छवि खराब हुई। फेसबुक पर अपलोड किए गये कई आपत्तिजनक चित्रों ने कथित तौर पर लोगों की धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंचाई।
मौजूदा समय में कई राजनीतिज्ञ व नौकरशाह फेसबुक पर अपनी दिनचर्या के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं। मालूम हो कि फेसबुक पर राज्य के निवासियों के करीब 16 लाख से अधिक प्रोफाइल हैं। एक मिनट में फेसबुक में पांच लाख से अधिक कमेंट दिए जाते हैं। प्रति मिनट 2.3 संदेश फेसबुक की वाल पर लिखे जाते हैं।
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बन रही नेटवर्किंग साइट राज्य की कानून व्यवस्था को बिगाड़ रही हैं। घाटी में हालात संवेदनशील हैं, छोटी सी चिंगारी भी आग लगाने का काम कर सकती है। राज्य सरकार ने इस बाबत अपनी चिंता केंद्र सरकार को जता दी थी। कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में जुटी सेना भी फेसबुक के खतरे से राज्य सरकार को अवगत करवा चुकी है।