वाम दलों की अगुवाई में आगामी 30 अक्तूबर को होने वाले धर्मनिरपेक्षता बचाओ महासम्मेलन में निशाने पर भाजपा ही नहीं कांग्रेस भी होगी।
धर्मनिरपेक्षता के बहाने एक मंच पर आने की कोशिशों में जुटे गैर एनडीए-गैर यूपीए दलों को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मुजफ्फरनगर दंगा मामले में दिए गए बयान ने एक बड़ा अवसर उपलब्ध करा दिया है।
तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले इस सम्मेलन में कम से कम दस दलों के नेता धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर तीसरे विकल्प की नींव रखने की रणनीति बनाएंगे।
इनकी योजना भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के सम्मेलनों का आयोजन करने की है। हालांकि भाकपा के वरिष्ठ नेता अतुल अंजान इसे तीसरे मोर्चे की गठन की राजनीतिक कसरत मानने से इंकार करते हैं।
उनका कहना है कि देश की राजनीति में तीसरा और चौथा मोर्चा बदनाम नाम बन गया है। कोशिश वाम दलों और जनवादी पार्टियों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वालों को सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुट रखने की है।
महासम्मेलन के बहाने लोकसभा चुनाव से पूर्व गैर एनडीए-गैर यूपीए दलों के नेता पहली बार किसी एक मुद्दे पर एक मंच पर जुटेंगे। वाम दलों में शामिल चार दलों के अलावा सपा, जदयू, जदएस, अन्नाद्रमुक, बीजेडी सहित कुछ अन्य राज्यों की छोटी पार्टियों ने महासम्मेलन में शिरकत करने पर हामी भरी है।
महासम्मेलन में माकपा महासचिव प्रकाश करात, भाकपा महासचिव एस सुधाकर रेड्डी, एबी बर्धन, सपा से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव, जदयू से नीतीश कुमार और शरद यादव शिरकत करेंगे। इसके अलावा अन्नाद्रमुक और बीजेडी अपना प्रतिनिधि भेजेंगे।
वाम दलों की योजना पुड्डुचेरी, नगालैंड और सिक्किम के मुख्यमंत्रियों को भी सम्मेलन में बुलाने की है। इसके अलावा वाम दल अपनी ओर से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को भी प्रतिनिधि भेजने के बाद खुद शिरकत करने के लिए मनाने में जुटे हैं।
दरअसल बीते दिनों मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों के बहाने बुलाए जा रहे इस महासम्मेलन में पहली योजना भाजपा और संघ परिवार को घेरने की थी। मगर इस बीच राहुल के विवादास्पद बयान ने वाम दलों को कांग्रेस को भी घेरने का बड़ा मौका उपलब्ध करा दिया है।
भाकपा सूत्रों का कहना है कि महासम्मेलन में इस बयान के बहाने कांग्रेस की भी जमकर खिंचाई की जाएगी। इसलिए एजेंडे में इस विवादास्पद बयान के साथ-साथ असम में बीते दिनों हुए सांप्रदायिक दंगों पर चर्चा को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा महासम्मेलन में धर्मनिरपेक्षता बचाओ के नाम पर देश के अन्य हिस्सों में भी सिलसिलेवार कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी।