संगठन के पद पर काबिज रहते हुए चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेस पदाधिकारी अब दोनों हाथों में लड्डू नहीं रख सकेंगे। जयपुर में चल रहे कांग्रेस के चिंतन शिविर में यह प्रस्ताव रखा गया कि राष्ट्रीय कांग्रेस व प्रदेश कांग्रेस से लेकर ब्लॉक स्तर की कमेटियों के पदाधिकारियों को पद से इस्तीफा देने की बाद ही लोकसभा या विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिया जाए।
इसके अलावा यह प्रस्ताव भी रखा गया कि चुनावी तैयारियों के लिए लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार एक साल पहले और विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नाम तीन महीने पहले ही तय कर दिए जाएं। इन प्रस्तावों को कांग्रेस अपनी नीति में शामिल कर लेती है, तो उन पदाधिकारियों की चिंता बढ़ सकती है, जो अगले लोकसभा व विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में खुद को टिकट का दावेदार मान रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को मजबूत बनाने का काम देख रहे नेता खुद चुनाव लड़ने के बजाय पार्टी को अधिक सीटें दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
नेताओं का तर्क है कि पदाधिकारी खुद की दावेदारी पर ध्यान देंगे, तो चुनाव के दौरान संगठन का काम अच्छी तरह से नहीं देख सकेंगे। प्रस्ताव में पार्टी के राज्य प्रभारियों के अलावा राष्ट्रीय, जिला, ब्लॉक अध्यक्ष और महासचिव जैसे पदों पर बैठे लोगों को पद पर रहते चुनाव न लड़ने की बात कही गई है।
चिंतन शिविर में पार्टी के भीतर सभी स्तरों पर नॉमिनेशन कल्चर खत्म करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। इसके तहत कहा गया कि पार्टी में अलग-अलग स्तरों पर नियुक्ति के लिए पसंद के आधार पर नामांकन होने की बजाय पारदर्शी रूप से चुनाव के जरिए नियुक्तियां की जाएं।
महिला को पूरा मिले आरक्षण
शिविर में महिला नेताओं ने जोरदार तरीके से कहा कि हर स्तर की कमेटियों में महिलाओं की तीस प्रतिशत भागीदारी पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रही है। इस मामले में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी महिला सशक्तिकरण को लेकर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से भी सशक्त करना होगा। सोनिया ने महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस में अधिक से अधिक महिलाओं की भर्ती पर जोर दिया।