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JNU पर बोले राजनीति के कई फायरब्रांड, पढ़ें किसने क्या कहा?

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जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने का मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी गर्माता जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का गुस्सा उबाल पर है। रविवार को एबीवीपी के साथ साथ भाजपा और विहिप ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया लाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पुतले फूंके। प्रदर्शनकारियों ने कन्हैयालाल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
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दिल्ली से लेकर मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और संभल तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र जेएनयू प्रकरण की निंदा करते हुए कन्हैया लाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। रामपुर में रविवार को छात्र नेता ऋषभ ठाकुर के नेतृत्व में छात्र और युवा एकत्र हुए। उन्होंने कन्हैया लाल के पुतले को फांसी पर लटकाकर आग के हवाले कर दिया।

वहीं विहिप और भाजपा ने बैठक कर घटना की निंदा की। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। आतंकवाद का पुतला फूंका। संभल में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। अमरोहा के हसनपुर में भाजपाइयों ने अंबेडकर पार्क चौराहे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला फूंका। साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ भी नारेबाजी की।
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बीएचयू के छात्र भिड़े

जेएनयू प्रकरण को लेकर रविवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित विश्वनाथ मंदिर में छात्रों के दो गुट भिड़ गए। सूचना पाकर पहुंचे प्रॉक्टर कर्मियों और पुलिस को देखते ही दोनों गुट के छात्र भाग निकले। बताया जाता है कि रविवार की रात छात्रों के दो गुट विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।

जेएनयू प्रकरण को लेकर आपस में ही एक-दूसरे का संप्रदाय और जाति पूछने लगे। इसी दौरान कुछ छात्रों ने दो-तीन छात्रों की पिटाई कर दी। शोरशराबा होते ही मौके पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य पहुंचे और तब तक पीछे से लंका पुलिस भी आ गई।

लंका थानाध्यक्ष संजीव कुमार मिश्र ने बताया कि कोई विशेष मामला नहीं था। छात्रों का गुट आपस में ही कहासुनी कर रहा था। पुलिस को देखते ही सभी खिसक लिए।

अफजल का महिमा मंडन करने वाले देशद्रोही

उत्तर प्रदेश के ही मेरठ स्थित भैसाली मैदान में रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ‘महानगर स्वयं सेवक संगम’ हुआ। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि यह परिवर्तन का दौर है। जो लोग कभी हिंदुत्व और हिंदुओं पर कटाक्ष और बुराई करते नहीं थकते थे, वह भी आज हिंदुत्व को स्वीकार रहे हैं।

आज इतने वर्षों के बाद जो सकारात्मक बात नजर आ रही है, वह यह कि लोगों में स्वीकार करने की क्षमता बढ़ी है। होसबोले ने कहा कि हिंदू कोई धर्म या मजहब नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, देश की सुगंध हैं। विश्व इसे मान्यता दे रहा है। तभी तो 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया है। यही नहीं, हिंदुत्व में समाहित संस्कृति, आयुर्वेद, योग, संस्कृत भाषा आदि को विश्व अपना रहा है। इसका मतलब यह नहीं हो गया कि उनका धर्म परिवर्तन हो गया।

उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुछ विद्यार्थियों ने आतंकी अफजल गुरू को महिमा मंडित किया और ऐसा कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आता है। इसके लिए देशद्रोह में कार्रवाई होनी चाहिए। हम देशभक्ति और स्वाभिमान के दम पर खड़ा होना चाहते हैं। लेकिन, विद्रोह शक्ति भी खड़ी हो रही है। अब ऐसी ताकतों का सच सामने लाना होगा। आने वाले 20-25 वर्षों में बहुत ही सतर्क होकर काम करना है, क्योंकि चुनौती बाहर और भीतर दोनों से है।

राहुल गांधी के रवैये पर केंद्रीय मंत्री ने उठाया सवाल

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के देवरिया में केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि जेएनयू में राष्ट्र विरोधी ताकतों के साथ खड़ा होकर राहुल गांधी ने अच्छा कार्य नहीं किया है। दोषियों के साथ उनका खड़ा होना बता रहा है कि वह देश के प्रति कितने गंभीर हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ऐसे ताकतों का विरोध करती है।

केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र रविवार को जिला पंचायत परिसर स्थित अपने आवास पर प्रेसवार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक राष्ट्रीय पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। उनकी पार्टी की चार दशकों तक सरकार रही है। उसके बाद भी उनका यह कृत्य समझ से परे है। उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सभी को मुस्तैदी से खड़ा होना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने देवरिया संसदीय क्षेत्र में कराए गए कार्यों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक 140 व्यक्तियों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2.60 करोड़ रुपये, 25 हजार परिवारों को गैस कनेक्शन, राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में देवरिया को 103 और कुशीनगर को 93 करोड़ स्वीकृत कराया है। संसदीय विकास निधि से दीवानी न्यायालय में अधिवक्ता हाल के साथ ही 96 अन्य विकास कार्य के लिए 4.60 करोड़ दिया गया है।

आदित्यनाथ ने कहा 'सरकार की कार्रवाई उचित'

भाजपा सांसद महंत आदित्यनाथ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के संदर्भ में केंद्र सरकार की वर्तमान कार्रवाई उचित ठहराया है। बोले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा होती है। जब यह स्वतंत्रता राष्ट्रीय संप्रभुता पर ही प्रहार करने लग जाए तो उन स्थितियों में उच्छृंखल तत्वों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। कहा कि जब भी शिक्षा संस्कारों से कटेगी तो उसमें भटकाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

सांसद ने यह बातें जवाहरलाल विश्वविद्यालय में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कहीं। उन्होंने कहा कि जेएनयू के अंदर जो कुछ भी हुआ वहां की शैक्षिक अराजकता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। ऐसा पहली बार जेएनयू में नहीं हो रहा है, यह वहां की प्रवृत्ति बन चुका है। देश की जनता की खून और पसीने की कमाई से प्राप्त टैक्स के अनुदान से संचालित यह विश्वविद्यालय आज शिक्षा का कलंक बन चुका है। इसके लिए वामपंथी छात्र ही जिम्मेदार नहीं हैं।

वहां पर मोटा वेतन लेने वाले शिक्षक भी जिम्मेदार हैं। कहा कि इससे दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है कि देश की संसद पर हमले के आरोपी के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया और देश की संप्रभुता को चुनौती दी गई। सेकुलरिजम के नाम पर वामपंथी दल, कांग्रेज, जेडीयू का आचरण अत्यंत शर्मनाक है।

सांसद ने कहा कि 1999 में कारगिल युद्ध के तुरंत बाद जेएनयू में एक मुशायरे का आयोजन किया गया। पाकिस्तान के एक शायर द्वारा जब भारत विरोधी प्रस्तुती पर वहां पर मौजूद सेना के दो अधिकारियों ने इसका विरोध किया। तब उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कहा कि वहां पर गो मांस की पार्टी की बात हो अथवा महिसासुर जैसे राक्षसों की जयंती मनाने का। प्रगतिशीलता के नाम पर यदि इस तरह की गतिविधियां संचालित होती हैं। अनुदान  बंद कर उस संस्थान को ही बंद कर देना चाहिए। राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता को चुनौती देने वाले तत्वों को सख्ती से रोका जाना चाहिए।

राजनाथ बोले, राष्ट्रविरोधी ताकतों को बख्शा नहीं जाएगा

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बीते दिनों लगे राष्ट्रविरोधी नारों से जुड़ी घटना को लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद का समर्थन प्राप्त है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और देश को इस हकीकत को समझना चाहिए। यह देश की अखंडता और एकता से जुड़ा मामला है, इसीलिए राजनीतिक दल ऐसी घटना का लाभ लेने की कोशिश न करें। किसी भी कीमत पर राष्ट्रविरोधी ताकतों को बख्शा नहीं जाएगा।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी की पत्नी स्वर्गीय सुधा त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देने आए राजनाथ ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जेएनयू की घटना आतंकी हाफिज सईद की शह पर हुई। मोदी सरकार लगातार कह रही है कि जो कोई भी देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर सवालिया निशान लगाता है, उसे कतई माफ नहीं किया जाएगा। इस मामले में बतौर गृहमंत्री आवश्यक निर्देश दे चुका हूं।

दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और जो निर्दोष हैं उन्हें किसी भी सूरत में परेशान नहीं किया जाएगा। जेएनयू मामले पर देश के सभी संगठन एवं राजनीतिक दलों से भी अपील है कि भारत की एकता, अखंडता पर इसकी संप्रभुता पर सवालिया निशान लगाने वाले के खिलाफ या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के मामले मे पूरे देश को एक स्वर में बोलना चाहिए। लाभ और हानि के तराजू पर तौलते हुए किसी को भी ऐसी किसी घटना से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी को लेकर गृहमंत्री ने कहा, पुलिस जांच कर रही है। अभी इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं है। राहुल गांधी की ओर से मामले को बढ़ावा देने के सवाल पर राजनाथ ने स्पष्ट तौर पर कुछ भी बोलने से मना किया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि राष्ट्रभक्ति से जुड़े सवाल पर सभी को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए, जो भी राष्ट्र की एकता, अखंडता, संप्रुभता पर सवालिया निशान लगाने की कोशिश करेगा उसे किसी भी सूरत पर माफ नहीं किया जाएगा। वहीं जेएनयू मामले में वामपंथी नेता डी राजा की बेटी केशामिल होने के सवाल पर राजनाथ चुप्पी साध गए।

गिरिराज ने कहा 'देश के स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं'

भाजपा के फायर ब्रांड नेता एवं केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने जेएनयू प्रकरण पर कहा कि देश के स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वे रविवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में विभागीय समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी अब बताएं कि देश में सहिष्णुता है या नहीं। समाज के एक तबके को खुश करने के लिए कांग्रेस राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि आजम खां को देश के संविधान पर भरोसा नहीं है। वह जेएनयू प्रकरण में सर्टिफिकेट बांट रहे हैं। नैतिकता के आधार पर उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

बिहार की नीतीश सरकार पर भी पर उन्होंने हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में लूट, हत्या और अपहरण की घटनाएं बढ़ रहीं हैं। मुख्यमंत्री बिहार की जनता को स्पष्ट करें कि वहां सरकार वे चला रहे हैं या कोई और। मुंबई आतंकी घटना के गुनहगार हेडली के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इशरत जहां को नीतीश ने बिहार की बेटी बताया था। कहा कि वैलेंटाइन डे भारतीय संस्कृति नहीं है। देश के विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस पर देशव्यापी बहस की जरूरत है।
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किसी को देश की एकता से खेलने का अधिकार नहीं

मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के परिसर में एक आयोजन के दौरान कथित भारत विरोधी नारेबाजी पर गुस्से का इजहार किया है। शहर में एक नाटक में शामिल होने आए खेर ने शनिवार रात कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी को भी देश की एकता को खंडित करने का अधिकार हो।

उन्होंने कहा कि भारत की राजधानी के बडे़ विश्वविद्यालय जेएनयू में कुछ लोग जमा होकर देश की बर्बादी के नारे आखिर कैसे लगा सकते हैं। यह अभिव्यक्ति की आखिर कौन सी स्वतंत्रता है, जिससे देश की एकता को खतरा हो।

60 वर्षीय अभिनेता ने कहा, आप किसी सरकार से नाखुश होकर उसके खिलाफ नारेबाजी कर सकते हैं। लेकिन देश की एकता को खंडित करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। देश की बर्बादी के नारे लगाए जाने के मामले में माफी का सवाल ही नहीं उठता। खेर ने जेएनयू की घटना को लेकर जारी राजनीति पर भी नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि वह जिला मजिस्ट्रेट से जेएनयू की घटना की जांच कराएंगे। क्या केजरीवाल ने इस घटना से संबंधित वीडियो नहीं देखा है?
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