सांप्रदायिकता को ले कर लगातार हो रहे हमले के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने रविवार को तीखा पलटवार किया।
संघ ने कहा कि दरअसल खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले दल ही घोर सांप्रदायिक हैं। यह सारा खेल अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण के लिए हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों बसपा प्रमुख मायावती ने संघ को सांप्रदायिक संगठन बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह बीते कई दिनों से संघ पर हमला बोल रहे हैं।
विरोधियों के हमले के संदर्भ में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि जो दल जितना अधिक सांप्रदायिक है, वह उतने ही जोरशोर से खुद को धर्मनिरपेक्ष साबित करने पर तुला हुआ है। सच्चाई यह है कि ये दल घोर सांप्रदायिक हैं।
वैद्य ने कहा कि संघ को सांप्रदायिक बताने वाले दलों के हालिया बयान, उनकी भाषा और कार्यप्रणाली से साबित हो जाता है कि असल में कौन सांप्रदायिक है।
उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। चुनाव से पहले अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण के लिए संघ विरोधी दल इसी तरह का हथकंडा अपनाते आए हैं।
वैद्य ने यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता का तमगा बांटने वालों की पृष्ठभूमि देख लीजिए, इनसे घोर सांप्रदायिक कोई और नहीं मिलेगा।
वैद्य ने भाजपा की नई पीढ़ी में नई संभावना होने की भी बात कही। नेतृत्व के सवाल को टालते हुए उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला लेना भाजपा का काम है। नेतृत्व तय करने के मामले में भाजपा फिलहाल ठीक से चलने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश में किसी भी क्षेत्र में अच्छे लोगों की कमी नहीं है। कई ऐसे हैं जो देश और जनता के हित में काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों में से देश को अच्छा नेतृत्व मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि चुनाव के ठीक पहले संघ के खिलाफ सियासी हमले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह संघ पर बम बनाने का प्रशिक्षण देने का आरोप लगा चुके हैं, जबकि मायावती संघ पर सांप्रदायिक घृणा फैलाने का आरोप लगाते हुए अदालत से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की अपील कर चुकी हैं।