आपको तो पता ही होगा कि 25 जून से रेल के सभी श्रेणी के किराये में 14.2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
इसके साथ ही रेल अधिकारियों ने फैसला लेते हुए 25 जून से दो महीने एडवांस में टिकट कराने वालों से बढ़ी दरों के मुताबिक किराया वसूलने का आदेश जारी किया।
रेलवे उन सभी लोगों से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा है, जिन्होंने किराया बढ़ने से पहले ही 25 जून या उसके बाद के टिकट खरीद लिए थे।
रेलवे के खिलाफ याचिका
हालांकि रेलवे के इस फैसले के खिलाफ एक वकील ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के रहने वाले वकील सर्वेश सिंह इस मामले को एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की है।
जिसमें उन्होंने रेल मंत्रालय और उत्तर रेलवे के जनरल मैनेजर का नाम शामिल किया है। उन्होंने रेलवे की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए इसे अनुचित करार दिया है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने रेल मंत्रालय से जवाब मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
रेलवे के सर्कुलर से बढ़ा विवाद
वकील सर्वेश सिंह का कहना है कि रेलवे ने सुविधा दी है कि कोई भी यात्री किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन की टिकट 60 दिन पहले बुक करा सकता है।
याचिकाकर्ता ने कहा, "उन्होंने 7 मई को उत्तर रेलवे की ओर से ई-टिकट बुक कराया। उन्होंने कहा, "इन टिकटों पर कहीं नहीं लिखा था कि रेलवे एक बार राशि वसूलने के बाद दोबारा से इन टिकटों का किराया बढ़ा सकता है।"
हालांकि इस मामले में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक की ओर से 20 जून को एक सर्कुलर जारी किया गया, जिसमें टीटी को निर्देश दिया गया कि 25 जून से किराया बढ़ने के बाद टीटी उन यात्रियों से किराए की अतिरिक्त राशि वसूलें, जिन्होंने एडवांस में टिकट खरीदा है।
अब कोर्ट लेगा फैसला
याचिकाकर्ता सर्वेश सिंह का कहना है कि जब यात्री रेलवे टिकट खरीदता है तो कानूनी तौर पर यात्री और रेलवे के बीच कानूनी अनुबंध हो जाता है।
रेलवे उन्हीं यात्रियों से बढ़ा हुआ किराया वसूल सकता है, जिन्होंने 25 जून के बाद टिकट लिया है।
इसी को लेकर सर्वेश सिंह ने याचिका दाखिल करके कोर्ट से इस मामले में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।