कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री नारायण राणे ने कहा है कि लवासा परियोजना को कानून के दायरे में रहकर ही मंजूरी दी गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह ने परियोजना में अनियमितता बरतने और जमीन में मनमाने ढंग से छूट देने का आरोप लगाया है। सिंह ने आरोप लगाया कि राणे ने परियोजना में अनियमितताओं के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया और राजस्व विभाग के मुख्य सचिव रमेश कुमार की आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया।
राज्य के पूर्व राजस्व मंत्री राणे ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह सिंह के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुमार की रिपोर्ट के आधार पर ही मैंने परियोजना में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री को अक्तूबर 2010 में रिपोर्ट सौंपी गई थी। देश में यह पहली पर्वतीय शहर परियोजना है। यदि हम उन अनियमितताओं के कारण परियोजना को रद्द कर दें जिन्हें कानून के दायरे में रहकर दूर किया जा सकता है तो विकास संभव नहीं है।
राणे ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और कार्यकर्ता अंजलि दमानिया की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं पर निशाना साधने को लेकर कड़ी आलोचना की। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे से मुलाकात की। ठाकरे ने भी केजरीवाल पर निशाना लगाते हुए कहा कि नेताओं पर निराधार आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है।