केंद्र सरकार ने स्वीकारा है कि इस बार अमरनाथ यात्रा पर पाक समर्थित आतंकी संगठन हमला कर सकते हैं। मंगलवार को गृह राज्य मंत्री किरेन रिजूजू ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले की तैयारी संबंधी खुफिया इनपुट की जानकारी दी है।
दरअसल खुफिया विभाग ने सरकार को पिछले महीने ही यह जानकारी दे दी थी। इसके मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को कई स्तर तक बढ़ा रखा है।
खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक लश्कर-ए-ताइबा तमाम कश्मीरी आतंकी और अलगाववादी संगठनों की ओर से 1996 में श्रद्धालुओं पर हमले नहीं करने के किए गए वादे को तोड़ने पर आमादा है।
अमर उजाला ने 27 जून को इस खुफिया रिपोर्ट के बारे में विस्तार से खबर प्रकाशित की थी। खुफिया विभाग के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक भारत में बड़ी वारदात करने को आतुर पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने इस बार की अमरनाथ यात्रा को अपना खास निशाना बना रखा है।
गृहमंत्रालय के अधिकारी घाटी में मौजूद
सुरक्षा विभाग को सूचना मिली है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और आरएसएस की बढ़ती सक्रियता और स्वीकार्यता पाक के भारत विरोधी तबके को खटक रही है। यही वजह है कि भारत में बड़े हमले करने का दबाव झेल रहा लश्कर अमरनाथ यात्रा को माकूल मौके की तरह देख रहा है।
सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक इस बार का खतरा वास्तविक है। सूत्रों के मुताबिक मोदी के शपथ ग्रहण के दो दिन पहले अफगानिस्तान के हेरात स्थित भारतीय दूतावास पर लश्कर का हमला इसी की बानगी थी।
दरअसल योजना थी कि दूतावास के लोगों को बंधक बना मोदी सरकार को चुनौती दी जाए। लेकिन उस वक्त मिली सटीक खुफिया जानकारी ने लश्कर की इस बड़ी योजना को कामयाब नहीं होने दिया।
यही वजह है कि अमरनाथ यात्रा से संबंधित खुफिया सूचना को हर साल की तरह नहीं देखा जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक गृहमंत्रालय और खुफिया विभाग के अधिकारी घाटी में मौजूद हैं।
1996 में हमाल न करने का किया था वादा
गृहमंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 1991 से 95 तक पाक समर्थित कश्मीरी संगठनों के हमले की आशंका के चलते यह यात्रा बंद थी। 1996 में बैक चैनल बातचीत में इन संगठनों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से अलिखित वादा किया था कि अमरनाथ श्रद्धालुओं की यात्रा पर कोई भी संगठन हमला नहीं करेगा।
लेकिन लश्कर ने करीब चार साल बाद इस वादे की परवाह किए बिना सन 2000 में अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर तीस लोगों को मार डाला था। अब चौदह साल की शांति के बाद खुफिया और सुरक्षा एजेंसी इस बार खास तौर पर सतर्क हैं।