पूर्वोत्तर के उग्रवाद प्रभावित राज्य नागालैंड में एक भाषा पर विवाद बढ़ता जा रहा है। मामला है केंद्र की ओर से नगामीज भाषा को राज्य की दूसरी अधिकृत भाषा के तौर पर बढ़ावा देने का। इस पर नगा समाज बंट गया है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य में सबसे ज्यादा लोग यही भाषा बोलते हैं।
नगामीज राज्य की संपर्क भाषा है। दो अलग-अलग समुदायों के लोग आपस में बातचीत के लिए नगामीज का इस्तेमाल करते हैं। यह टूटी-फूटी असमिया, हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं का मिश्रण है। सरकारी कामकाज की भाषा के तौर पर नगामीज को मान्यता देने की पहल का विरोध करने वाले लोगों की दलील है कि किसी भी बोली को भाषा के तौर पर मान्यता देने की पहली शर्त यह है कि उसकी अपनी लिपि होनी चाहिए, लेकिन इसकी अपनी कोई लिपि नहीं है।
उधर, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की दलील है कि नगामीज के जरिए राज्य के विभिन्न तबके के लोग आपस में बातचीत करते हैं। यह नगा समाज में आपसी संवाद का सबसे अहम जरिया है।