प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर लोकसभा की कार्यवाही के बार-बार स्थगित होने की वजह से सोमवार को विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक पेश नहीं किया जा सका। सरकारी सूत्रों ने कहा कि बिल सदन की कार्यसूची में शामिल था। सूत्रों ने कहा कि सपा सांसदों के प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर बार-बार व्यवधान की वजह से बिल को सदन पेश नहीं किया जा सका। अब इस बिल के मंगलवार को सदन में पेश किए जाने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले ही हफ्ते ही बिल को मंजूरी दे दी थी। इस बिल के तहत अब प्राइवेट प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहीत करने के लिए 80 फीसदी लोगों की सहमति आवश्यक कर दी गई है। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्टों के लिए 70 फीसदी लोगों की सहमति जरूरी होगी।
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की सलाह पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस बिल का मसौदा तैयार किया था। इसका मकसद भूमि अधिग्रहण में ज्यादा पारदर्शिता लाना, पुनर्वास और पुनर्स्थापन को व्यवस्थित रूप देने और जमीन के मालिकों को उचित मुआवजा देना है। गांधी ने सरकार से कहा था कि इंडस्ट्री स्थापित करने के उद्देश्य से जमीन की खरीद के लिए इलाके के 80 फीसदी भूमि मालिकों की रजामंदी ली जाए। सूत्रों ने कहा कि गांधी मंत्रियों के समूह के उस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थी, जिसमें पीपीपी और इंडस्ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए दो तिहाई लोगों की सहमति की बात कही गई थी।