चारा घोटाले में आरोपी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू
प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राहत देते हुए निचली अदालत के
फैसला सुनाने पर रोक लगा दी है।
इस मामले में झारखंड की रांची अदालत
ने 15 जुलाई को फैसला सुनाना था। सर्वोच्च अदालत ने लालू की याचिका पर
सीबीआई को भी नोटिस जारी कर 23 जुलाई तक जवाबी हलफनामा दायर करने का
निर्देश भी दिया।
लालू ने इस घोटाले से जुड़े एक मुकदमे को किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर किए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
राजद
अध्यक्ष ने इस मामले में उनकी एक याचिका झारखंड हाईकोर्ट द्वारा खारिज
किये जाने को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने एक जुलाई को लालू की स्थानांतरण
याचिका खारिज कर दी थी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली
है और उसने 15 जुलाई को फैसले की तारीख मुकर्रर की थी। लेकिन शीर्षस्थ
अदालत के निर्देश के बाद अगले आदेश तक रोक रहेगी।
यह मुकदमा
अविभाजित बिहार की चाईंबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड रुपये की अवैध निकासी से
जुड़ा है। चाईंबासा अब झारखंड का हिस्सा है। चारा घोटाले के बीच लालू यादव
अविभाजित बिहार के मुख्यमंत्री थे।
इस मामले में 45 आरोपियों में
लालू के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा भी शामिल हैं। वर्ष 1996
में सामने आए करोड़ों रुपये के चारा घोटाले के 61 मामलों में से करीब 54
मामले वर्ष 2000 में झारखंड गठन के बाद वहां स्थानांतरित कर दिये गये थे।
इनमें से पांच मुकदमे लालू और मिश्रा से संबंधित हैं। सीबीआई की विभिन्न अदालतों ने अब तक 43 मुकदमों में फैसले सुनाए हैं।
क्या था मामला
साल 1996 में सीबीआई जांच में करीब 900 करोड़ रुपए के चारा घोटाले में लालू यादव का नाम आने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस संबंध में 61 केस दर्ज किए गए थे।
नवंबर 2000 में जब बिहार से अलग होकर झारखण्ड बना तब 61 में से 54 केस वहां ट्रांसफर कर दिए गए थे। सीबीआई की विभिन्न अदालतें 43 मामलों में अब तक फैसला सुना चुकी हैं।