लालकृष्ण आडवाणी। पांच बरस पहले पीएम इन वेटिंग का दर्जा हासिल करने वाले भाजपा के वयोवृद्ध नेता अभी हार मानने को तैयार नहीं। नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति की कमान देना हो या फिर प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाना, आडवाणी ने हमेशा विरोध किया।
जब पार्टी ने तय कर लिया कि मोदी के नाम पर मुहर के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, तो ऐसा लगा कि आडवाणी सुलह के मूड में आ गए और मोदी का साथ देने को तैयार हैं।
ऐसी खबरें आईं कि मोदी, आडवाणी को राज्यसभा की राह दिखाना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और गांधीनगर उनकी पहली पसंद है। लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
गांधीनगर नहीं भोपाल चाहते हैं वयोवृद्ध नेता
सीट तय होने से ऐन पहले लालकृष्ण आडवाणी ने इच्छा जाहिर की है कि वह गांधीनगर नहीं, बल्कि भोपाल से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके पीछे वजह क्या है, यह अलग कहानी है।
लेकिन फिलहाल भाजपा इस बात पर चर्चा कर रही है कि आडवाणी को कहां से टिकट दिया जाए। इस वक्त भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति इस पर चर्चा कर रही है और जल्द ही फैसला सामने आ सकता है।
बैठक में नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज पहुंच चुके हैं, लेकिन खुद आडवाणी अभी नहीं पहुंचे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि भोपाल से उनका लड़ना लगभग तय है और अंतिम फैसला होने के बाद आडवाणी इस बैठक में पहुंच जाएंगे।
चर्चा है कि अगर आडवाणी गांधीनगर सीट पर चुनाव लड़ने पर सहमत नहीं हुए तो नरेंद्र मोदी इस सीट को लेकर अंतिम फैसला करेंगे।
गुजरात में भितरघात का डर
इससे पहले भाजपा में अंदरखाने काफी बवाल हो चुका है। भोपाल से मौजूदा सांसद कैलाश जोशी ने आडवाणी को मध्य प्रदेश की राजधानी से लड़ने का न्योता दिया है और दूसरी ओर गुजरात भाजपा ने गांधीनगर से लड़ने का निमंत्रण भेजा है।
लेकिन आडवाणी अब गांधीनगर से नहीं लड़ना चाहते। उन्हें डर है कि इस सीट पर उन्हें भितरघात का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वह वहां से भोपाल जाना चाहते हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी से खबर आ रही है कि आडवाणी ने मन बना लिया है और इसका असर शहर में दिखने लगा है। वहां आडवाणी के समर्थन में पोस्टर लग गए हैं।