सभी केंद्रीय विद्यालयों में वैकल्पिक विषय के रूप में जर्मन की जगह संस्कृत अनिवार्य कर दिए जाने के बाद शुक्रवार को बरेली के विद्यालयों से जर्मन शिक्षक निकाल दिए गए हैं। बीच सत्र में जर्मन की बजाय संस्कृत पढ़ने के आदेश से बच्चे भी परेशान हैं।
अब तक केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा छह, सात और आठ के विद्यार्थी वैकल्पिक विषय के रूप में जर्मन पढ़ते थे। 11 नवंबर को जर्मन की जगह संस्कृत अनिवार्य रूप से पढ़ाने का आदेश आने के बाद अगले ही दिन से जर्मन विषय की पढ़ाई बंद कर दी गई थी। शुक्रवार को केंद्रीय विद्यालयों से जर्मन शिक्षक भी निकाल दिए गए।
जेएलए के जर्मन शिक्षक जब स्कूल से निकाले गए तो बच्चे रो पड़े। बच्चों के साथ ही उनके अभिभावक भी बीच सत्र में संस्कृत पढ़ने के फरमान से परेशान हैं। बरेली में पांच केंद्रीय विद्यालय हैं, केवी जेआरसी, जेएलए, केवी एनईआर, केवी आईवीआरआई और केवी इफ्को आंवला।
केवीएस की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में हुए निर्णय के बाद ज्वॉइंट कमिश्नर की ओर से यह आदेश स्कूलों में जारी किया गया था। इसमें यह भी कहा गया था कि जरूरत पड़ी तो अभिभावकों और बच्चों की काउंसिलिंग भी की जा सकती है। कक्षा छह, सात के विद्यार्थियों को संस्कृत इस विषय के टीजीटी शिक्षक ही पढ़ाएंगे। अगर बच्चा संस्कृत की जगह पर कोई अन्य आधुनिक भारतीय भाषा का चुनाव करेगा तो उन्हें पढ़ाने के लिए अनुबंधित शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है।