बहुचर्चित कोलकाता चिटफंड घोटाला मामले में पुलिस ने शारदा ग्रुप के सीएमडी और एक डायरेक्टर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
इन्हें कश्मीर के पर्यटन स्थल सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया।
कश्मीर के आईजी अब्दुल गनी मीर ने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस की सूचना पर इन्हें गिरफ्तार किया गया।
इनमें कंपनी के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर सुदिप्तो सेन, डायरेक्टर देबजनी मुखर्जी और अरविंद कुमार चौहान शामिल हैं।
पुलिस ने पश्चिम बंगाल के नंबर वाली स्कार्पियो गाड़ी भी जब्त कर ली है। तीनों को फिलहाल गांदरबल पुलिस लाइन में रखा गया है।
धोखाधड़ी के आरोप में फंसी चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप के खिलाफ एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने बंदाल के डीजीपी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (सिट) के गठन के आदेश दिए थे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि शारदा ग्रुप की गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान वाला अध्यादेश तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि वामपंथी सरकार ने चिटफंड कारोबार को रोकने के लिए जो कानून बनाए थे, वह फर्जी कारोबार को रोकने के लिए नाकाफी रहे।
सूत्रों ने बताया कि पश्चिमी बंगाल में लोगों को चार हजार करोड़ रुपये की चपत लगाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए तीनों सैर-सपाटे के लिए कश्मीर चले आए थे। दोपहर के समय तीनों स्कार्पियो से सोनमर्ग में घूम रहे थे।
इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की और उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस के आला अधिकारी इनसे पूछताछ करने में जुटे हैं।
सुदिप्तो सेन की पहचान बनी संदिग्ध
शारदा ग्रुप के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक सुदिप्तो सेन की पहचान को लेकर अलग-अलग अटकलें लगाईं जा रही हैं। कुछ राजनीतिज्ञों से करीबी संबंध होने के सुदिप्तो हमेशा लाभ उठाता रहा है।
इसी कारण बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस भी सवालों के घेरे में फंस गई है।
लोगों के भारी विरोध के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्च स्तरीय बैठक कर मामले की जांच के लिए डीजीपी के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया।
रिकॉर्ड में उसके पिता का नाम नृपेंद्र नारायण सेन दर्ज है। जबकि चर्चा है कि उसके पिता का असली नाम भूदेव सेन है, जो 80 के दशक में बंगाल में संचयनी ग्रुप के जरिए लोगों को करोड़ों की चपत लगाकर फरार हो गए थे। फिलहाल सिट मामले की जांच में जुटी है।
पश्चिम बंगाल में 20 हजार करोड़ से ज्यादा की ठगी
दिलचस्प है कि शारदा ग्रुप ने पश्चिम बंगाल में 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है। हजारों निवेशकों ने इस कंपनी में पैसा लगाया था।
इस कंपनी में पैसा लगाने वाली एक महिला कंपनी के भागने के बाद खुदखुशी तक करने की कोशिश कर चुकी है।
आपको बताते चलें ये चिटफंड कंपनियां छोटे निवेशकों को अलग-अलग ऑफरों के तहत 15 महीने में रकम दोगुनी और 25 साल में 34 गुनी रकम करने तक का वादा करती हैं।