‘कम्यूनिटी सॉल्यूशन ही मॉडल ऑफ क्राइम प्रिवेंशन है।’ अमर उजाला के बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि किरन बेदी ने ये बात कही। शुक्रवार को पूर्व आईपीएस और सामाजिक कार्यकर्ता किरन बेदी ने कहा कि केवल लड़कियों को ही मजबूत और साक्षर नहीं बनाना है। लड़कों को भी शिक्षा और सामाजिक मूल्य सिखाने पड़ेंगे ताकि लड़कियों को दोहरी सुरक्षा मिले। इसके लिए हर गली-मोहल्ले में गुरुकुल बनाने पड़ेंगे।
किरन बेदी ने अमर उजाला अभियान की जमकर तारीफ की और कहा कि निश्चित रूप से यह अभियान लोगों के दिलो-दिमाग को बदलेगा। गोष्ठी में शामिल होने वाले प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और कला के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाली महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘कानून एक रिएक्शन है और समाज एक प्रिवेंशन’। कानून बनाकर केवल क्राइम को रोकने का प्रयास हो सकता है। इसकी जड़ को समाप्त करने के लिए ऐसी शिक्षा की जरूरत है, जो स्कूलों में नहीं मिलती। इसके लिए गुरुकुल, एनजीओ या घर में ही बेटों को सामाजिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया जाए।
आगे पढ़िए 'बेटी ही बचाएगी' कार्यक्रम में किरन बेदी ने क्या कहा-
'समाज को अपराध से बचा सकते हैं बाल गुरुकुल'
अमर उजाला 'बेटी ही बचाएगी' कार्यक्रम में किरन बेदी ने कहा, 'हम अपराध होने की खबरें हर रोज देखते पढ़ते और सुनते हैं। हम अपराधियों की धरपकड़ और उन्हें सजा मिलने की खबरें भी देखते हैं। हमने सड़कों पर आंदोलन भी देखे हैं पर क्या अपराध को रोकने के लिए यह सब काफी है? यह सब चीजें तब एक्शन में आती हैं जब समाज का नुकसान (क्राइम) हो चुका होता है। हम सिर्फ थाने और पुलिस की ताकत से क्राइम पर काबू नहीं पा सकते।'
उन्होंने कहा कि किसी शख्स को अपराधी बनने से पहले भी रोका जा सकता है और यह काम हम-आप यानी समाज कर सकता है। हम बच्चों में संस्कार और जिम्मेदारी के बीज बोएं और वो भी उस उम्र में जिसमें उनपर ऐसी बातों का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। बारह वर्ष का बच्चा चीजों को समझने की काबिलियत रखता है। इसलिए इसी उम्र में उसे समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का अहसास करा देना चाहिए। बच्चों को संभालने-संवारने और सुधारने की इस कोशिश को मैंने ‘बाल गुरुकुल’ का नाम दिया है। छब्बीस साल पुरानी हमारी नवज्योति संस्था इसमें जुटी हुई है।
'अहातों में चल रहे हैं बाल गुरुकुल'
बेदी ने कहा कि ये गुरुकुल गलियों, पार्क, मंदिरों और मस्जिदों के अहातों में चल रहे हैं। अपराध की रोकथाम का नवज्योति मॉडल उन परिस्थितियों पर काम करता है जो अपराध की राह खोलते हैं, जैसे- अशिक्षा, बाल शोषण, स्कूल छूटना, बेरोजगारी, माता-पिता का ध्यान न देना और समाज का असहयोग। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के स्लम इलाकों में चल रहे बाल गुरुकुल एक तरह से बच्चों की यूनिवर्सिटी है। यहां बड़े सिर्फ उन्हें दिशा देते हैं बाकी सब बच्चे करते हैं। हमारे गुरुकुल में इस वक्त ढाई हजार बच्चे शामिल हैं, जिन्हें अपने समुदाय के प्रति जिम्मेदार बनाने का काम किया जा रहा है।
बच्चों ने खुद विभाग तय कर रखे हैं जैसे स्पोर्ट्स और योगा, आईटी, कौशल, स्पेशल एजुकेशन, पर्यावरण, चरित्र निर्माण इत्यादि। इन सब विभागों के मुखिया खुद बच्चे हैं। हर विभाग ने अपना-अपना मिशन तय कर रखा है। हम बच्चों से पूछते रहते हैं कि बताओ तुम्हारे विभाग ने हाल फिलहाल में क्या किया। ऐसे ही सवाल के जवाब में एक 14 साल के बच्चे ने बताया कि उसने अपने इलाके के पांच छात्रों को नशा छोड़ने की सलाह दी। आप देखिए, इस पूरे मॉडल का मकसद बच्चों की ऊर्जा को सही जगह लगाना और उन्हें बुराइयों से दूर रखना है। जैसा कि हमेशा कहा जाता है, ‘इलाज से बेहतर है बचाव।’