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यहां कबूतरों को लेकर बह रहा है इंसानी खून

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पुणे के निगदी में 17 साल के स्कूली छात्र की हत्या कर दी गई। झगड़े का कारण कबूतर को लेकर विवाद को बताया जा रहा है।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इससे पहले पिछले साल सितंबर में तालेगांव के रहने वाले 30 वर्षीय गणेश खानडागले की हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि उसके कबूतरों की चोरी करने वालों ने ही उसकी हत्या कर दी थी। गणेश कबूतरों की खरीद-फरोख्त का काम करते थे।

पूरे शहर भर में 1,000-1,500 लोग कबूतरों को पालते हैं। इन कबूतरों में विभिन्न तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें घरेलू से लेकर विदेशी प्रजातियों के कबूतर तक होते हैं। बाजार में इन कबूतरों की कीमत 10,000 से 50,000 रूपए तक होती है।
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कबूतरों को लेकर बढ़े झगड़े

जानवरों के फोटोग्राफर राजा पुरोहित ने बताया बाजार में कबूतरों को लेकर लड़ाई, अपहरण, फिरौती और हत्या तक के मामले सामने आ रहे हैं।

प्रत्येक बुधवार और रविवार को शिवाजी नगर स्थित मुथा नदी के किनारे पर कबूतरों की खरीद-फरोख्त का काम होता है। यह स्‍थान इस तरह के झगड़ों के लिए जाना जाता है।

कई बार जब लोग अपने पक्षियों को उड़ने के लिए छोड़ते हैं तो कई बार पक्षी उड़ते-उड़ते दूसरों के स्‍थान तक पहुंच जाते हैं। तब लोग ऐसे पक्षियों को अपने पास रख लेते हैं।
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पुलिस में नहीं हो सकता केस दर्ज

कबूतरों का कारोबार करने वाले अभिजीत भोकरे ने बताया कि कुछ साल पहले तक इसको 'कैच एंड कीप' की गतिविधि के तौर पर जाना जाता था। पर अब तस्वीर बदल गई है।

अब आपराधिक गतिविधि में शामिल लोग भी ऐसे कामों में शामिल हो गए हैं। क्योंकि इसमें पैसा आ गया है। अब उन लोगों ने कबूतरों की चोरी भी शुरू कर दी है।

अभिजीत ने बताया कि पिछले साल सितंबर में यहां पर 100 से ज्यादा कबूतरों को एक रात में ही चोरी कर लिया गया था। इस तरह की वारदातों की रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हो पाती है।

क्योंकि कोई ये नहीं बता पाता है कि कौना सा कबूतर किसका है? वहीं पुलिस भी इस तरह के मामलों की एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है। क्योंकि कबूतर की चोरी का केस दर्ज करने का कोई प्रावधान भी ही नहीं है।
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