कोहनियों तक जुड़े हाथ और झुर्रियों से ढके चेहरे पर आंखों से टपकते आंसू.. भर्राई हुई आवाज और बस एक ही फरियाद.... ‘मुझे मेरी माटी में दफन होने की इजाजत दे दो’।.. यूं तो इस वाकये को पूरे चार साल और 21 दिन बीत चुके हैं। लेकिन लगता है कल ही की बात है। पाकिस्तानी में ब्याही और मुरादाबाद में जन्मी 85 साल की खुर्शीद बानो ने तब हिंदुस्तान की सरकार से ये फरियाद की थी।
लेकिन दोनों मुल्कों के बीच के तल्ख रिश्ते और वीजा कानून उनकी ख्वाहिश के दरमियान चट्टान की तरह खड़े थे। सरकार ने उनकी अर्जी नामंजूर कर दी थी। खुफिया एजेंसियों ने खुर्शीद से वापस अपने मुल्क पाकिस्तान लौटने का तकादा शुरू कर दिया था। ऐसे हालात में अमर उजाला ने खुर्शीद की गुहार को शब्द दिए तो मुरादाबाद की बेटी की मार्मिक गुहार दिल्ली में बैठे हुक्मरानों तक पहुंची। लंबी जद्दोजहद हुई, कानून के पन्ने पलटे गए।
आखिरकार सरकार झुकी और बतौर स्पेशल केस खुर्शीद बानो को आजन्म एलटीवी पर मुरादाबाद में रहने की इजाजत दे दी गई थी। तभी से वो मुरादाबाद में थीं। गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे खुर्शीद दुनिया से रुखसत हो गईं और उन्हें उसी कब्रिस्तान में दफना दिया गया जहां उनके वालिद और बहनें दफन हैं।