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वो कलेक्टर, जिसने लालू को पहुंचाया जेल

Tue, 01 Oct 2013 12:39 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
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एक सीनियर आईएएस अफसर और एक रिटायर्ड आईपीएस अफसर को उस सूची के लोगों में सबसे ऊपर रखा जाता है, जिन्हें 17 साल पुराने चारा घोटाले के 45 आरोपियों का दोष साबित करने का श्रेय दिया जा रहा है।
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तत्कालीन बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी अमित खरे 1996 में पश्चिमी सिंहभूम जिले के डिप्टी कमिश्नर थे, जब उन्होंने इस घोटाले की परतें पहली बार खोली।
सोमवार को जब रांची में विशेष सीबीआई अदालत ने 45 आरोपियों को दोषी ठहराया, तो अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव का पद संभाल रहे खरे ने मजाक में कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं रिटायरमेंट से पहले यह दिन देख पाऊंगा।"
रिटायर्ड आईपीएस अफसर उपेन बिस्वास उस वक्त सीबीआई जॉइंट डायरेक्टर थे और उन्होंने इस मामले पर लगातार निगाह रखी है। लेकिन सोमवार को उन्होंने चुप रहना बेहतर समझा। वह खुद अब राजनीति में हैं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक खरे ने कहा, "हर अधिकारी को बिना डरे कानून का पालन करना चाहिए। हम सभी इसलिए यहां हैं। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि तमाम दबाव के बावजूद जो लोग वरिष्ठ नौकरशाह हैं, वे जूनियर इंजीनियर या चीफ मेडिकल ऑफिसर की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं...इसलिए हमारा कानून के लिए खड़ा होना और ज्यादा जरूरी है।"
ऐसा नहीं कि घोटाले से परदा हटाने वालों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। खरे का तबादला उस वक्त बिहार स्टेट लेदर को-ऑपरेशन में कर दिया गया था, जहां पिछले छह महीने से तनख्वाह नहीं मिली थी।
साथ ही उन्हें बिहार कम्बाइंड एंट्रेंस एग्जाम बोर्ड का कंट्रोलर बनाया गया, जिसका कोई वजूद ही नहीं था। खरे ने इसे दोबारा खड़ा किया और कामयाबी के साथ चलाकर दिखाया।
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