आखिरकार केशुभाई पटेल गुजरात में कांग्रेस के लिए भस्मासुर ही साबित हुए। गुजरात परिवर्तन पार्टी के गठन के बाद ही आशंका जताई गई थी कि यदि केशुभाई पटेल सत्ताविरोधी लहर को अपनी ओर खींचने में सफल हुए तो नुकसान कांग्रेस को ही होगा।
आंशका सच साबित हुई। अब तक आए रुझानों में कांग्रेस गुजरात में 2007 से भी कम सीटें जीत पाई है। वोटों के आंकड़े तो अब तक नहीं आए हैं लेकिन संकेत साफ हैं कि सत्ताविरोधी वोटों का बंटवारा हुआ है और भाजपा को सीधा उसका फायदा मिला है।
कांग्रेस भी इस सच्चाई से इनकार नहीं कर रही है। कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा है कि गुजरात में उनकी पार्टी को केशुभाई पटेल ने नुकसान पहुंचाया और सरकार विरोधी उसके वोट काट कर भाजपा की जीत सुनिश्चित की।
शकील अहमद ने कहा कि कहा कि प्रारंभिक रुझानों और परिणामों से लगता है कि केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी ने दरअसल भाजपा के वोट काटने की बजाय कांग्रेस के खाते में आने वाले सरकार विरोधी वोट काटे हैं।
दरअसल गुजरात में पिछले साल हुए पंजाब विधानसभा चुनावों की परिपाटी दोहराई गई है। पंजाब में विधानसभा चुनावों के पूर्व शिरोमणि अकाली दल के मुखिया प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल ने पंजाब पीपुल्स पार्टी का गठन किया था।
कांग्रेस के रणनीतिकारों ने त्रिकोणीय मुकाबले में अपने जीत की प्रबल संभावाना जताई थी। लेकिन हुआ ठीक उलट मनप्रीत बादल ने कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाया औरी अकाली दल लगातार दूसरी बार सत्ता में आने मे सफल रहा।