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कश्मीर वाली केसर अलीगढ़ में उगाई, जलालुद्दीन तुम्हें बधाई

Mon, 20 Apr 2015 04:10 PM IST
आशीष निगम/भूपेंद्र चौधरी, अलीगढ़/अतरौली
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यूपी के अलीगढ़ जिले के अतरौली के गांव गनियावली में केसर लहलहा रही है। इसके फूलों को चुन-चुन कर सुखाया जा रहा है। खरीददार की तलाश जारी है जल्द ही इसे बेचा जाएगा।
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आमतौर पर कश्मीर जैसे ठंडे इलाकों में पैदा होने वाली ये केसर पहली बार अलीगढ़ में उगाई गई है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस हाईब्रिड केसर के रेट 70 हजार रुपये प्रति किलो तक मिलने की उम्मीद है। जो इससे निकलने वाले अर्क पर निर्भर करेगा।

आलू और गेहूं की फसल बर्बाद होने के कारण सदमे से मौत का शिकार हुए किसानों के लिए केसर की खेती नई मंजिल साबित हो सकती है। ये काम करना तो कृषि विभाग को चाहिए था लेकिन इसकी पहल अधेड़ उम्र के जलालुद्दीन ने की।
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कम पढ़े लिखे मेहनती किसान जलालुद्दीन ने सरकार और सिस्टम के साथ नेताओं को भी आइना दिखाया है कि अगर सही दिशा में काम किया जाए तो नई मंजिलें भी मिलती हैं। ये छोटी सी फसल इसलिए भी बहुत बड़ी है कि जब पूरे देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों की बर्बादी का मातम है तो वहीं जलालुद्दीन ने उम्मीद की नई रोशनी चमकाई है।
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फौजी से शुरू हुआ सिलसिला

जलालुद्दीन ने बताया कि कश्मीर में तैनात रहे एक फौजी ने अपने रिश्तेदार गांव बहरावद निवासी राजेंद्र सिंह को केसर के कुछ बीज लाकर दिए थे। चार साल तक राजेंद्र केसर को अपने ही घर में उगाते रहे और उसका बीज तैयार किया। जलालुद्दीन और राजेंद्र गहरे दोस्त हैं। बातचीत हुई और केसर उगाना तय हुआ।

बाजार में इसके बीज की कीमत सात लाख रुपये प्रति किलो है। इसीलिए दोस्तों में तय हुआ कि खेत में मेहनत जलालुद्दीन की और बीज राजेंद्र सिंह का रहेगा। फसल का मुनाफा आधा-आधा। इस पर जलालुद्दीन ने करीब तीन बीघा खेत में केसर के बीज गाड़ दिए। खास बात ये कि पैदावार पर ज्यादा खर्च नहीं आया। हां मेहनत जरूर हुई और मेहनत के बूते ही इस असंभव मानी जा रही फसल को उगाया गया।

केसर कहां बिकेगी..?
जलालुद्दीन बताते हैं कि केसर उन्होंने पैदा तो कर ली है लेकिन इसे वह कहां बेचेंगे इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि अभी तो केसर के सूखने में समय लगेगा। तब तक पता लगा रहे कि केसर आखिर कहां बेची जाए। कुछ लोगों ने बताया है कि इसके खरीददार जयपुर और दिल्ली में मिलेंगे।

ऐसे हुई केसर
अमेरिकन हाईब्रिड स्पाइनिश केसर का 50 ग्राम बीज एक बीघा जमीन पर रोपा जाता है। जिससे पांच महीने में करीब 10 किलो केसर का उत्पादन हो जाता है। यदि टेस्टिंग में केसर का 45 प्रतिशत अर्क निकला तो उसका भाव 70 हजार रुपये किलो तक मिल सकता है।

अन्य फसलों की तुलना में केसर की खेती करना सरल है, ड्रिप पद्धति से फसल होती है। पौधों में कोई बीमारी नहीं लगती। जैविक फसल का पौधा 4-5 फुट लंबा होता है जिस पर दो सौ से ढाई सौ तक फूल लगते हैं जिनकी पंखुड़ियों से केसर मिलती है।
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