यूपीएससी में टॉप करने वाली केरल की हरिता वी कुमार ने साबित किया है कि इंसान में अगर जज्बा हो तो वह मन चाही चीज हासिल कर सकता है।
इंडियन रेवेन्यू सर्विस में अधिकारी हरिता ने कहा, ‘पहले प्रयास में मुझे सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में भी मैं 179वें नंबर पर ही। पिछले साल तो मेरा रैंक 294 रहा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और आखिरकार मेरी मेहनत रंग लाई।’
हरिता वी. कुमार फरीदाबाद के सेक्टर-29 में रहती हैं। हालांकि वह मूल रूप से केरल के तिरुवनंतपुरम की निवासी हैं।
लेकिन दो वर्ष पहले आईआरएस में 179वीं रैंक हासिल कर नेशनल अकादमी ऑफ कस्टम, एक्साइज एंड नॉरकोटिक्स (नासेन) में प्रशिक्षण ले रही हैं, जिसका कार्यालय फरीदाबाद में है।
हरिता ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि बहुत कठिन परिश्रम कर इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। 20-20 घंटे पढ़ाई के बाद यहां तक पहुंची हूं। परीक्षा के लिए यह उनका चौथा व अंतिम मौका था।
दूसरे मौके में आईआरएस में 179वीं रैंक हासिल की थी। जिसके बाद नासेन में प्रशिक्षण ले रही हूं।
नासेन हॉस्टल में प्रशिक्षण लेने के साथ-साथ यूपीएसई की तैयारी के लिए कुछ टॉपरों के साथ नासेन की ही अकादमी को ज्वाइन कर रखा था।
उन्होंने बताया कि उनकी सफलता में सबसे अधिक योगदान मां-पिता, भाई, शिक्षक और मित्रों का रहा है। जिन्हें इसका पूरा श्रेय देना चाहती हूं।
उन्होंने बताया कि अक्तूबर 2012 में यूपीएसई 2012-13 की मेन परीक्षा में सफलता हासिल की। मार्च-अप्रैल 2013 में इंटरव्यू और पर्सनेल्टी टेस्ट भी पास किया, जिसका परिणाम शुक्रवार को जारी किया गया।
उन्होंने बताया कि वह दो भाइयों की अकेली बहन हैं। दोनो भाई इंजीनियर हैं, जिसमें से एक भाई सिविल सर्विसेज की तैयारी भी कर रहा है। पिता विजय कुमार गृहनगर में व्यवसायी हैं। मां हाउस वाइफ हैं।
खेलकूद में किसी भी प्रकार की रुचि नहीं है, लेकिन कर्नाटक संगीत का बहुत अधिक शौक है।
इस शौक को पूरा करने के लिए वह शास्त्रीय संगीत व नृत्य की कक्षाएं भी लगा लेती हैं। मौजूदा समय में अपने सहयोगियों को यह गुर सिखाने में जुटी हैं।
सोशल एक्टिविटीज में हिस्सा लेना बहुत पसंद है। मूक बधिरों की आवाज बनना अच्छा लगता है। इसके लिए केरल की एक सामाजिक संस्था के साथ जुड़ी हैं।