केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी की पहचान मुश्किल दौर में वापसी करने वाले नेता की रही है। चांडी ने इसे एक बार फिर साबित किया है।
केरल हाई कोर्ट ने सोलर घोटाले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी को राहत देते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।
दूसरी ओर कांग्रेस हाई कमान का भी उन्हें समर्थन हासिल है। इसे समझने के लिए बीते 48 घंटों की घटनाएं देखनी होंगी। गुरुवार को एक सतर्कता अदालत ने सोलर घोटाले में चांडी पर प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया था। शुक्रवार को हाई कोर्ट ने फैसले पर रोक लगा दी।
वहीं, कांग्रेस ने सोलर घोटाले की शिकायत करने वाली सरिता एस नायर की मंशा पर सवाल उठाए हैं। नायर ने जस्टिस शिवराजन न्यायिक आयोग के सामने कहा था कि उन्होंने चांडी के सहयोगी को 1.9 करोड़ रुपए की रिश्वत दी।
सोलर घोटाला मामले में घिरी सरकार
हालांकि इस मामले का कानूनी तौर पर फैसला होने में अभी वक्त लगेगा। एक अन्य मामले बार में रिश्वत प्रकरण पर भी फैसला आने में समय है, जिसमें दो मंत्रियों को भी इस्तीफा देना पड़ा था। मंत्रियों ने कहा था कि रिश्वत मिलने के बाद वे बार पर पाबंदी नहीं लगाएंगे।
मगर एक के बाद एक मंत्रियों पर आरोप के बाद मुख्यमंत्री पर आरोप लगने से सरकार की विश्वसनीयता हिल गई है। चार महीने के भीतर राज्य में चुनाव भी होने हैं।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एमजी राधाकृष्णन ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''यह कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार की छवि पर बड़ा दाग है। लेकिन जब तक नेतृत्व करने वालों को यह नहीं लगेगा कि इस मामले में चांडी की जिम्मेदारी बनती है, तब तक उनसे पद छोड़ने को नहीं कहा जाएगा क्योंकि वे जमीनी स्तर पर काफी मजबूत नेता हैं।''
चुनावों पर होगा कितना असर?
डेक्कन क्रॉनिकल, कोच्चि के कार्यकारी संपादक केजे जैकब कहते हैं, ''चांडी किसी भी विवाद से बाहर निकल आने में निपुण हैं। यूडीएफ के लिए नैतिकता का मापदंड लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) से काफी कम है। एलडीएफ कभी आरोपों से घिरे मंत्री को सत्ता में नहीं रखता। यूडीएफ ने सभी स्तरों को गिराया है।''
राधाकृष्णन कहते हैं, ''चांडी के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अल्पसंख्यकों (ईसाई और मुस्लिम, जो कुल आबादी का 46 फीसदी हिस्सा) का समर्थन हासिल है। यह तबका हमेशा यूडीएफ के लिए वोट देता रहा है जबकि हिंदू लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के समर्थक रहे हैं।''
मगर हाल के पंचायत चुनावों में एलडीएफ को अरसे बाद जीत मिली है। भारतीय जनता पार्टी को 14 फीसदी वोट मिला है, जो केरल जैसे राज्य में बेहद अहम है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव के त्रिकोणीय होने के आसार बढ़ गए हैं।
'यूडीएफ में चांडी को चुनौती देने वाला कोई नहीं'
राधाकृष्णन कहते हैं, ''भारतीय जनता पार्टी के उभार से अल्पसंख्यक डरे हुए हैं। इसके लिए यूडीएफ में चांडी को चुनौती देने वाला भी कोई नहीं है।''
हालांकि जैकब की राय दूसरी है, ''ईसाइयों को आरएसएस से उतना डर नहीं जितना मुसलमानों से है। उपचुनाव के दौरान चांडी के बयानों के चलते ईसाइयों के एक तबके ने पंचायत चुनावों में सीपीएम को वोट दिया था। इससे कांग्रेस की जीत का अंतर कम हुआ।''
राधाकृष्णन कहते हैं, ''अभी एलडीएफ को फायदा दिखा रहा है पर सभी घोटालों के बावजूद चांडी अभी भी मजबूत नेता बने हुए हैं। अल्पसंख्यकों में उन्हें काफी समर्थन है। उन्हें हटाना आसान नहीं है।''
दूसरे शब्दों में कहें, तो कांग्रेस विधानसभा चुनावों के दौरान सत्ता में लौटने के लिए राजनीतिक गलियारे में रणनीतिकार के बतौर मशहूर चांडी पर ही अपना भरोसा कायम रखेगी।