सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार और रियल स्टेट कंपनी डीएलएफ में गहरी सांठगांठ है। सच तो यह है कि हरियाणा सरकार डीएलएफ की एजेंट बन गई है।
केजरीवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के साथ धोखा करते हुए गुड़गांव में 50 एकड़ जमीन डीएलएफ को सेज (स्पेशल इकॉनोमिक जोन) बनाने के लिए दी। इस जमीन पर अस्पताल बनना था। उसी समय रॉबर्ट वाड्रा ने डीएलएफ में 50,000 शेयर खरीदे। सेज में रॉबर्ट वाड्रा 50 फीसदी के पार्टनर थे। हालांकि एक साल बाद रॉबर्ट वाड्रा ने सेज में से अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी।
केजरीवाल ने कहा कि डीएलएफ ने 85 करोड़ रुपये का लोन बिना ब्याज पर रॉबर्ट वाड्रा को दिए। केजरीवाल ने पूछा कि आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी रकम बिना गारंटी के डीएलएफ ने वाड्रा को दिया? केजरीवाल ने वाड्रा के प्रति डीएलएफ की इस कृपादृष्टि पर सवाल खड़े किए। आखिर किस लाभ के लिए डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा को यह कर्ज दिया? इसके अलावा डीएलएफ ने कई फ्लैट बाजार कीमत से कम दाम पर रॉबर्ट वाड्रा को दिए।
केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने कानून को ताक पर रखकर 1700 करोड़ की 350 एकड़ जमीन डीएलएफ को दी। यह जमीन आम लोगों की थी। वहीं 'हुडा' की 75 एकड़ जमीन भी डीएलएफ को दी गई।
हालांकि कांग्रेस ने केजरीवाल को इन सारे आरोपों को निराधार बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि प्रचार पाने के लिए अरविंद ये सारे हथकंडे अपना रहे हैं। अरविंद के पास कोई सबूत है तो वे शिकायत क्यों नहीं करते? वे मीडिया के बजाय अदालत क्यों नहीं जाते?